रणथंभौर के बाघों पर मंडराया नया खतरा! 6 बाघों की मौत के बाद वन विभाग हुआ अलर्ट

Ranthambore Tiger Reserve, CDV virus: मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिज़र्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के असर से 6 से ज्यादा टाइगर्स की मौत हो चुकी है। इतनी बड़ी तादाद में मौतों के बाद राजस्थान के Ranthambore Tiger Reserve में भी रह रहे बाघों को बचाने के लिए वन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है।
मध्यप्रदेश में बाघों की मौत के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने सभी टाइगर रिजर्व को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। NTCA ने एडवाइजरी भी जारी कर कहा कि यह वायरस सिर्फ बाघ ही नहीं, कई तरह के जंगली जानवरों के लिए खतरा और घातक हो सकता है। रणथंभौर रिज़र्व के वन अधिकारी ने कहा कि यह वायरस कुत्तों के ज़रिये फैलता है और बाघ, तेंदुओं और भेडियों में भी फैल सकता है।
वन अधिकारियों के अनुसार, CDV (Canine Distemper Virus) एक संक्रामक वायरस है जो मुख्य रूप से कुत्तों के जरिए वन्यजीवों में फैलता है। इस वायरस के लक्षणों में बाघों की प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना, बुखार, आंख और नाक से पानी बहना, उलटी, दस्त, भूख में कमी, और बीमारी गंभीर होने पर लकवा, सीज़र (seizure) जैसी चीज़ें शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल से लगे गांवों में घूमने वाले आवारा कुत्ते वन्यजीवों में वायरस फैलने के लिए सबसे बड़ा माध्यम बन सकते हैं।
इसी खतरे को देखते हुए वन विभाग ने रणथंभौर और आसपास के इलाकों में कुत्तों के वैक्सीनेशन की तैयारी शुरू कर दी है। वन विभाग स्थानीय प्रशासन और पशुपालन विभाग की मदद से ऐसे गांवों की पहचान कर रहा है, जहां से कुत्ते जंगल में ज्यादा आते हैं। ऐसे इलाके वाले गांवों में डोर-टू-डोर अभियान चलाकर कुत्तों को टीका लगाया जाएगा।
खबर है कि जोधपुर बायोलॉजिकल पार्क में इस वायरस के असर से एक भेडिये की मौत हो चुकी है और अगर समय रहते रोकथाम नहीं की गई तो यह वायरस बाघों समेत दूसरे वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
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