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शिक्षा माफियाओं को संरक्षण देना बंद करें सरकार, सचिन पायलट बोले- 'पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री तुरन्त दें इस्तीफा'

शिक्षा माफियाओं को संरक्षण देना बंद करें सरकार, सचिन पायलट बोले- 'पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री तुरन्त दें इस्तीफा'
राजस्थान
24 May 2026, 07:17 pm
रिपोर्टर : Rakesh Choudhary

Sachin Pilot on NEET Paper Leak: कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि नीट पेपर लीक प्रकरण केवल सरकार-प्रशासन की विफलता नहीं हैं, बल्कि यह हमारे देश के युवाओं के भविष्य के साथ किया जा रहा एक जघन्य अपराध है। नीट पेपर लीक ने देश के 22 लाख से अधिक विद्यार्थियों के सपनों और उनकी वर्षों की मेहनत को कुचल कर रख दिया है। पायलट ने आज प्रदेश के झुंझुनू जिले के गुढ़ा गौड़जी पहुंचकर नीट-2026 परीक्षा में शामिल हुए छात्र स्व. प्रदीप मेघवाल को श्रृद्धांजलि अर्पित की l उनके परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढ़स बंधाया। इस अवसर पर मीडिया को सम्बोधित करते हुए उन्होंने ये बातें कही।

पायलट ने कहा कि गरीब और मध्यम वर्गीय माता-पिता अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य की आस में लाखों रुपये का कर्ज लेकर उन्हें पढ़ाते हैं, लेकिन इस भ्रष्ट व्यवस्था ने उनका विश्वास पूरी तरह से तोड़ दिया है। यह अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब इस अन्याय के खिलाफ पीड़ित परिवारों और युवाओं ने न्याय की गुहार लगाई, तो पुलिस और प्रशासन ने उनके साथ संवेदनहीनता दिखाते हुए दुर्व्यवहार किया। इस व्यवस्था की नाकामी के कारण जो जान गई है, उसकी पूरी जिम्मेदारी इस तंत्र और सरकार की है।

सरकार ने FIR दर्ज क्यों नहीं की?

पायलट ने आगे कहा कि यह पूरी तरह से स्पष्ट हो चुका है कि यह पेपर लीक कोई छिटपुट घटना नहीं है, बल्कि करोड़ों रुपयों का एक सुनियोजित खेल है जिसे बड़े शिक्षा माफिया चला रहे हैं। यह बेहद हैरानी की बात है कि जब पहली बार गड़बड़ी की बात सामने आई, तब प्रदेश की सरकार ने समय पर एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी क्यों की। उन्होंने कहा कि जब पुलिस अधिकारियों को खुद इस गड़बड़ी का अंदेशा था और दिल्ली में छात्रों के व्यापक विरोध के बाद एनटीए ने भी सरकार को सचेत कर दिया था, तब भी मामले पर पर्दा डालने का प्रयास किया गया। सरकार ने अपनी इच्छाशक्ति से कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि जब छात्रों ने खुद ‘‘गेस पेपर‘‘ और असली पेपर का मिलान कर इस महाघोटाले को बेनकाब कर दिया, तब जाकर मजबूरी में सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े। छोटी-छोटी बातों श्रेय लेने वाली और बड़े मगरमच्छों को पकड़ने का वादा करने वाली सरकार अब तक केवल दिखावे की कार्रवाई कर रही है और असली सरगनाओं को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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जनभावनाओं को कुचलने का प्रयास न करे

इस महाघोटाले और प्रशासनिक विफलता की सीधी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री को अविलंब अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। हमारे देश के नौजवानों के भविष्य को पैसों के दम पर अंधकार में धकेलने का अधिकार किसी भी नेता, अधिकारी या माफिया को नहीं है। यह मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का है। हमारे नेता राहुल गांधी ने स्वयं पीड़ित परिवारों से बात कर उनका दुख साझा किया है और यह स्पष्ट किया है कि हम इस संघर्ष में युवाओं के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। पायलट ने सरकार को सचेत किया कि वह जनभावनाओं को कुचलने का प्रयास न करे। युवाओं को न्याय दिलाने और शिक्षा माफियाओं के पूर्ण खात्मे तक हमारी यह लड़ाई बिना रुके जारी रहेगी।

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