क्या है डूंगरी बांध विवाद, क्या कहना है ग्रामीणों और सरकार का

पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) के तहत प्रस्तावित डूंगरी बांध को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। जहां सरकार दावा कर रही है कि बांध से केवल 16 गांव प्रभावित होंगे, वहीं स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना से 76 गांव डूब क्षेत्र में आ जाएंगे। इसी मतभेद ने विवाद को और उग्र कर दिया है।
किसानों का दावा- 76 गांव पूरी तरह डूब जाएंगे
महापंचायत में किसानों ने दावा किया कि बांध बनने से 76 से 88 गांव पूरी तरह डूब जाएंगे और करीब 87 हजार बीघा जमीन जलमग्न हो जाएगी। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार जंगल और गांव उजाड़कर 11 जिलों को पानी देने की योजना बना रही है, जबकि स्थानीय इलाके जैसे सपोटरा और भूरी पहाड़ी आज भी प्यासे हैं। राकेश टिकैत ने इसे किसान-विरोधी परियोजना करार दिया, जबकि राजेंद्र गुढ़ा ने तीन कृषि कानूनों की तरह जनआंदोलन से इसे रद्द कराने की बात कही।
सरकार ने कहा- 76 नहीं, सिर्फ 16 गांव प्रभावित
इधर, महापंचायत के कुछ घंटे बाद ही राजस्थान सरकार ने जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर किसानों के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत, कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने स्पष्ट किया कि डूंगरी बांध (राम जल सेतु लिंक परियोजना के तहत) से केवल 72 या 76 नहीं, सिर्फ 16 गांव प्रभावित होंगे। इनमें कुल 4,387 मकान-भवन आएंगे।
सरकारी मंत्री और अधिकारी इस बात पर अडिग हैं कि “76 गांव प्रभावित होने का दावा पूरी तरह गलत है”, और वास्तविक आंकड़ा सिर्फ 16 गांवों तक सीमित है। सरकार यह भी कह रही है कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास और मुआवजा नीति लागू की जाएगी।
पर्यावरणीय खतरे भी चिंता का विषय
परियोजना के विरोध में पर्यावरण कार्यकर्ता भी शामिल हो गए हैं। उनका कहना है कि बाणास नदी पर बनने वाला यह विशाल बांध आसपास के जंगल, वन मार्ग और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा। सवाईमाधोपुर–करौली क्षेत्र बाघ और तेंदुओं की गतिविधियों का प्रमुख मार्ग माना जाता है, जिस पर बांध निर्माण का सीधा असर पड़ेगा।
मंत्रियों ने विपक्षी नेताओं पर साधा निशाना
मंत्रियों ने विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला बोला और कहा कि जिन नेताओं को जनता ने नकार दिया है, वे राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए 76 गांव डूबने की झूठी अफवाह फैला रहे हैं और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की साजिश कर रहे हैं। किसानों से अपील की गई कि वे ऐसे नेताओं के बहकावे में न आएं। सरकार हर समय बातचीत के लिए तैयार है और किसान प्रतिनिधि मंडल कभी भी अधिकारियों व मंत्रियों से मिलकर पूरी परियोजना समझ सकता है।
उग्र आंदोलन की तैयारी और चेतावनी
देर शाम कोर कमेटी की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया. अगर 1 दिसंबर तक मुख्यमंत्री से बांध रद्द करने पर कोई अच्छी बात नहीं हुई तो 10 दिसंबर से उग्र आंदोलन शुरू होगा. किसान अब और इंतजार नहीं करेंगे. वे सड़कों पर उतरने को तैयार हैं. यह महापंचायत दिखाती है कि डूंगरी बांध का मुद्दा अब सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि राजनीतिक और किसान आंदोलन का बड़ा हिस्सा बन गया है.
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