SUN, 30 NOVEMBER 2025

राष्ट्रभर में रानी लक्ष्मीबाई की जयंती, पीएम मोदी और अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि

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19 Nov 2025, 11:53 am
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रिपोर्टर : Ashish Bhardwaj

आज पूरा देश झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की जयंती मना रहा हैं, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपने अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम का एक ऐसा उदाहरण स्थापित कर दिया है जिसे कभी मिटाया नहीं जा सकता। रानी लक्ष्मीबाई का जन्म मणिकर्णिका (मनु) के रूप में हुआ और उन्होंने शास्त्रों में बहुत अधिक लगाव था इसलिए उन्होंने उन्होंने उसी में अपनी शिक्षा पूरी की। उनका विवाह झांसी के राजा गंगाधर राव से हुआ और वे लक्ष्मीबाई बन गईं। रानी लक्ष्मीबाई ने केवल झांसी का राजकाज ही नहीं संभाला, बल्कि घुड़सवारी, तलवारबाजी और सैन्य प्रशिक्षण में भी अपनी महारत दिखाई।


जब राजा गंगाधर राव का निधन हुआ, लॉर्ड डलहौजी ने दत्तक पुत्र दामोदर राव को झांसी का उत्तराधिकारी मानने से इंकार कर दिया और राज्य को ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाने की घोषणा की। इस समय रानी लक्ष्मीबाई ने गर्जना की:"मैं अपनी झाँसी नहीं दूंगी।" यह न केवल शब्द थे, बल्कि भारतीय स्वाभिमान का शंखनाद बन गए। रानी ने पुरुषों और महिलाओं को एक साथ लेकर सेना का गठन किया। झलकारीबाई जैसी सहयोगियों के साथ उन्होंने ब्रिटिश सेना के खिलाफ अदम्य शौर्य दिखाया। भारी संख्या और आधुनिक हथियारों से लैस ब्रिटिश सेना के सामने मुट्ठीभर सैनिकों के साथ उनका डटे रहना उनकी नेतृत्व क्षमता और साहस का प्रमाण है।


पीएम मोदी ने एक्स पर कहा


प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “मां भारती की अमर वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। आजादी के पहले संग्राम में उनकी वीरता और पराक्रम की कहानी आज भी देशवासियों को जोश और जुनून से भर देती है। मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए उनके त्याग और संघर्ष को कृतज्ञ राष्ट्र कभी भुला नहीं सकता।”



अमित शाह ने कहा


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “मातृभूमि की रक्षा को जीवन का सर्वोच्च ध्येय बनाने वालीं रानी लक्ष्मीबाई जी ने अपनी दूरदृष्टि से सन् 1857 की क्रांति को आकार देने में अविस्मरणीय भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी वीरता, अद्भुत शौर्य और पराक्रम से अंग्रेजों की कूटनीति से लेकर युद्ध के मैदानों तक दांत खट्टे किए। हर देशवासी को उनकी वीरगाथा अवश्य पढ़नी चाहिए और मातृभूमि के प्रति त्याग व समर्पण की प्रेरणा लेनी चाहिए। महान वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई जी को उनकी जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से वंदन करता हूं।”


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