ट्रम्प–पाकिस्तान की सीक्रेट डील या ईरान सीज़फायर के पीछे रूस-चीन का गेम प्लान!

ट्रम्प–पाकिस्तान की सीक्रेट डील या ईरान सीज़फायर के पीछे रूस-चीन का गेम प्लान!
अंतरराष्ट्रीय
08 Apr 2026, 03:26 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

US Iran Ceasefire: अमेरिका, पाकिस्तान और ईरान के बीच चल रहे खेल में आज एक ऐसा खुलासा हुआ है जो ट्रम्प की पूरी कूटनीति को दुनिया के सामने लाकर रख दे रहा है। ट्रंप एक तरफ दुनिया के सामने शांति-दूत बनने का ढोंग रच रहे हैं और पर्दे के पीछे पाकिस्तान के साथ मिलकर एजेंडा चला रहे हैं। बातें चाहे जो भी हो लेकिन असली खेल तो रूस और चीन ने किया है। पाकिस्तान के लिए पोस्ट करने के बाद ट्रंप ने AFP से भी कहा कि चीन ने इसमें काफी मदद की है। यानी रूस–चीन (Russia-China) के कूटनीतिक चाबुक ने ट्रम्प को मजबूर कर दिया कि वो ईरान पर अब हमलों को रोक दें।

देखा जाए तो ट्रम्प का हालिया बयानबाज़ी भारत के हितों के खिलाफ जाता दिखा। चाहे ईरान पर कार्रवाई हो या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की राजनीति, हर कदम से हिंदुस्तान की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर देखा गया। फिर भी ट्रम्प लगातार ऐसे फैसले ले रहे हैं, जो भारत को कमजोर और पाकिस्तान को मजबूत कर रहे हैं। ऐसे में ये सवाल उठना लाज़मी है कि क्या ट्रम्प की विदेश नीति खुद भारत को निशाने पर रखकर बनाई जा रही है? क्योंकि ट्रम्प ने सीजफायर की घोषणा की और तुरंत पाकिस्तान का नाम उछाल दिया। मानो पाकिस्तान ही दुनिया का शांति-दूत हो।

IMF की पाकिस्तान को फंडिंग बना बड़ी वजह?

दरअसल कूटनीतिक हलकों में यही बात घूम रही है कि पाकिस्तान सिर्फ ट्रम्प (Donald Trump) के टूलकिट का हिस्सा हैं। संदेश किसी और का, मुहर पाकिस्तान (Pakistan) की। पाकिस्तान को दुनिया के सामने "मिडलमैन" दिखाकर असल में अमेरिका ने अपने असली दबाव को छिपा रखा है। तो क्या IMF ने पाकिस्तान को जो 1 बिलियन डॉलर की फंडिंग की थी। वो सिर्फ इकोनॉमिक रिलीफ़ था या फिर कूटनीति की सीक्रेट डील। क्योंकि ऐन उसी समय जब अमेरिका ईरान को धमका रहा था। पाकिस्तान को अचानक IMF राहत मिलती है और कुछ दिन बाद पाकिस्तान को "सीजफायर का हीरो" बताया जाता है। ये जो टाइमिंग है। वो बहुत कुछ कह रही है। जो ट्रंप कुछ घंटे पहले तक ईरान को मिट्टी में मिलाने की धमकी दे रहे थे। वो कुछ ही घंटों बाद सीजफायर का ऐलान कर देते हैं।

ट्रंप का टूलकिट है पाकिस्तान?

अब बात गौर से सुनिए ये एक स्क्रिप्टेड टूलकिट था। जिसे ट्रम्प को मजबूरी में पढ़ना पड़ा। क्योंकि रूस और चीन ने पर्दे के पीछे से अमेरिका पर डिप्लोमैटिक स्ट्राइक कर दी। अब आप समझे कि असल गेम पाकिस्तान का नहीं था। बल्कि ये गेम चल रहा था रूस और चीन के बीच।

दरअसल UN सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ बहरीन का प्रस्ताव आया था। 11 वोट इसके पक्ष में थे। लेकिन रूस और चीन ने इसे सीधा वीटो कर दिया। ये वीटो सिर्फ वोट नहीं था। बल्कि ट्रम्प को भेजी गई चेतावनी थी। रूस ने कहा कि प्रस्ताव खतरनाक है और पूरा सच नहीं दिखाता। तो चीन ने कहा कि ये प्रस्ताव जड़ों को छूता ही नहीं है। दोनों ने साफ संदेश दिया कि ईरान पर हमला जारी रहा तो वैश्विक ऊर्जा बाजार फट जाएगा। तेल की कीमतें पहले ही आसमान छू रही थीं। विदेशी जानकारों का ये भी कहना है कि चीन और रूस ने अमेरिका को पर्सनली समझाया था। जिससे अमेरिका खुद दबाव में आ गया और बस यहीं से ट्रम्प की आवाज बदल गई।

इस बात पर मुहर खुद अमेरिका के अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लगाई कि चीन ने सीज़फायर में अहम भूमिका निभाई है। चीन ने ही ईरान को बातचीत के लिए तैयार किया। इतना ही नहीं पाकिस्तान के बारे में पोस्ट करने के बाद अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी AFP को ट्रंप ने खुद बताया कि चीन ने ईरान को सीजफायर के लिए राजी किया। यहां इस बात पर भी गौर कीजिए कि ये वही चीन है जो अमेरिका को हर मोर्चे पर चुनौती दे रहा है। अब वही चीन अमेरिका को मजबूर करता है कि वो ईरान से बातचीत करे। इसे ही तो ग्लोबल डिप्लोमेसी कहते हैं और जानकार कह रहे हैं कि चीन इस कूटनीति में जीत गया है और ट्रम्प इस सीजफायर का क्रेडिट पाकिस्तान को देकर दुनिया को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं और भिखमंगा पाकिस्तान तुरन्त इसे अपनी कूटनीतिक जीत बताने से भी पीछे नहीं हटा।

अब ये सीजफायर सिर्फ 14 दिन का है। ये असली शांति की शुरुआत हो सकती है या तूफान से पहले की खामोशी दुनिया की नज़र अब इस पर है कि क्या ईरान और अमेरिका स्थायी समाधान की तरफ बढ़ते हैं या ये सिर्फ एक ठंडी सांस लेने का बहाना था? ये तो वक्त आने पर ही पता चलेगा।


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