ताकतवर देशों पर भारी पड़ रहा भिखमंगा पाकिस्तान, ट्रंप ने पकड़ी ऊंगली तो बढ़ गए भाव

Pakistan on USA Iran War: युद्ध इन दिनों अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा हुआ है और भाव भिखमंगे-फटेहाल पाकिस्तान के बढ़ रहे हैं। आज के वक्त में पाकिस्तान की वैल्यू इतनी बढ़ गई है कि वो दुनिया के बड़े-बड़े देशों पर भी भारी पड़ता नजर आ रहा है। ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि इन दिनों जो सियासी परिदृष्य बन रहा है, वो ये चीख-चीख कर रहा है। लेकिन ये भी सच है कि पाकिस्तान को ये चंद दिनों की खुशी है वो भी ट्रंप की दी हुई है।
दरअसल पाकिस्तान में फिर से ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता वार्ता होने वाली है। जिसके लिए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वहां होंगे और ईरान के प्रतिनिधि होंगे। इससे पहले भी 6-7 अप्रैल को दोनों देशों के बीच पाकिस्तान में ही शांति वार्ता हुई थी जो कि फेल हो गई थी। अब फिर से पाकिस्तान में दूसरी बार ये किया जा रहा है। पिछली वाली में भी और इस वाली में मुख्य मध्यस्थता पाकिस्तान ही निभा रहा है। जबकि मिस्र और तुर्की इनडायरेक्ट तौर पर मदद कर रहे हैं।
पाकिस्तान क्यों बना इतना महत्वपूर्ण?
लोगों के मन में सवाल है कि आखिर पाकिस्तान क्यों इस समय खुद को अमेरिका के कम नहीं समझ रहा? तो आपको बता दें कि इसका मौका खुद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया है। विदेशी मामलों के जानकार कह रहे हैं कि पाकिस्तान जैसे देश ऐसे क्षेत्रीय देश हैं जो अपने इलाके में काफी प्रभाव रखते हैं। बावजूद इसके ये अमेरिका या चीन जितने ताकतवर नहीं होते लेकिन ये सोशल इंजीनियरिंग के लिए काफी अहम रोल निभाते हैं।
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पाकिस्तान की 'गरीबी' बना रही उसे पॉवरफुल
पाकिस्तान जैसा देश इस शांति वार्ता का अगुआ इसलिए बन रहा है क्योंकि पाकिस्तान को पता है अगर ईरान-अमेरिका का युद्ध लंबा चला तो सबसे ज्यादा नुकसान उसे ही होगा क्योंकि वो भारत जितना पॉवरफुल नहीं है। सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट में फंसे उसके जहाज से पाकिस्तान में तेल की किल्लत नहीं बल्कि उस रास्ते आने वाले हर माल से उसका खाना-पीना होता है, ऐसा नहीं होता तो वहां दाल-रोटी तक के लाले पड़ जाएंगे। वैसे ही पाकिस्तान में महंगाई चरम पर है।
डोनाल्ड ट्रंप के बेटे ने पाकिस्तान में किया है निवेश
इधर डोनाल्ड ट्रंप के बेटे ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद तो पाकिस्तान में भारी-भरकम निवेश किया है। जिससे पाकिस्तान की बांछे खिली हुई हैं। ट्रंप जानते हैं कि चीन सीधे-सीधे तो उनके कंट्रोल में आएगा नहीं तो उसके भाई पाकिस्तान की उंगली पकड़कर वे इस मुद्दे पर आगे बढ़ना चाहते हैं। लेकिन खुद डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर के ऐलान के वक्त कहा था कि वो मानते हैं कि चीन ने, ईरान के साथ अमेरिका के सीजफायर में बड़ी भूमिका निभाई है। इधर ट्रंप के इस दावे को न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार ने अपने एक आर्टिकल में प्रूफ भी कर दिया। जिसमें लिखा था कि दोनों देशों में सीजफायर कराने में रूस और चीन की बड़ी भूमिका रही है।
यानी पाकिस्तान को डोनाल्ड ट्रंप जो ये फिजूल का भाव दे रहे हैं वो बस कुछ ही दिन का है। क्योंकि अगर इस बार की भी वार्ता विफल हो गई तो मुश्किल ही ट्रंप और ईरान तीसरी बार पाकिस्तान पर भरोसा करेंगे। ऐसे में पाकिस्तान के पास अभी ही समय से उसे जितना उछलना है उछल ले।
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