THU, 15 JANUARY 2026

वेनेजुएला का तेल बना दुनिया के लिए बड़ा सिरदर्द! क्या अमेरिका की वजह से तहस-नहस हो जाएगी धरती?

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अंतरराष्ट्रीय
09 Jan 2026, 01:22 pm
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रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Donald Trump Venezuela Oil Politics: हाल के कुछ दिनों में वैश्विक राजनीति में ऐसा धमाका हुआ है कि जिसने सुपरपावर अमेरिका के खेल की असलियत दुनिया के सामने लाकर रख दी। ये वही अमेरिका है जिसने वेनेज़ुएला पर हमला करके वहां के राष्ट्रपति मादुरो को उठा लिया था और ये कहा था कि मादुरो (Nicolas Maduro) पर ड्रग सप्लाई और नार्को टेरर का आरोप है इसलिए ये कार्रवाई की गई। लेकिन अब डोनाल्ड ट्रंप ये खुलकर बोल रहे हैं कि इस देश का तेल पर सिर्फ औऱ सिर्फ हमारा अधिकार है।




सामान्य नहीं है वेनेजुएला का तेल


लेकिन यहां सवाल ये है कि अमेरिका वेनेज़ुएला का पूरा तेल निकालता है तो दुनिया पर इसका क्या असर पड़ेगा? वेनेज़ुएला कोई मामूली देश नहीं है, ये दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। यहां करीब 303 अरब बैरल का तेल भंडार है। ये मात्रा इतनी है कि इससे कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं खड़ी हो सकती हैं और कई गिर भी सकती हैं। लेकिन इतना तेल होने के बावजूद वेनेजुएला सऊदी अरब औऱ UAE की तरह अमीर क्यों नहीं है? क्यों वेनेजुएला की आर्थिक हालत इतनी खराब है? तो इसका जवाब है कि यहां का तेल सामान्य नहीं है। ये बहुत भारी, गाढ़ा, चिपचिपा है, समझिए बिलकुल गुड़ जैसा। इसलिए इसे निकालना बेहद मुश्किल है। इसलिए इसका धरती से निकलना औऱ इसका इस्तेमाल करना हमारी धरती की सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि इसमें कार्बन ज्यादा है तो उत्सर्जन भी ज्यादा होगा और मीथेन का रिसाव तो इतना कि ग्लोबल वार्मिंग का ग्राफ सीधे नीचे से ऊपर जाएगा।


धरती के तापमान में होगी बेतहाशा बढ़ोतरी


इसका मतलब साफ है कि वेनेज़ुएला में तेल निकालना मतलब प्रदूषण का बढ़ना। यानी दुनिया का तापमान रेड ज़ोन में जाना। इस तेल को डीजल-पंप से नहीं बल्कि जमीन में भाप पंप करके पिघलाया जाता है। वहीं अगर अमेरिका ये पूरा तेल का खजाना अपने कब्जे में लेता है तो क्या होगा? जानकारों का कहना है कि तब दुनिया की राजनीति अन्य मुद्दों से हटकर तेल पर केंद्रित हो जाएगी। क्योंकि तब तेल की कीमतें महीनों में नहीं बल्कि घंटों-मिनटों में तय होंगी जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था डगमगा सकती है उसका संतुलन बिगड़ सकता है। वहीं यूरोप-चीन-भारत पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर हो जाएंगे और सबसे बड़ा खतरा, वो है धरती का तापमान बढ़ना।

दरअसल वेनेज़ुएला के इस भारी तेल को रिफाइन करने में इतनी ऊर्जा लगेगी कि प्रदूषण वैश्विक औसत से दोगुना हो जाएगा। वहीं अगर इस पूरे भंडार को निकाला गया तो धरती का तापमान वैसे उछलेगा जैसा कभी हुआ नहीं। इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के क्लाइमेट एक्सपर्ट्स साफ कह रहे हैं कि तेल निकालने की ये प्रक्रिया ग्लोबल वार्मिंग को कई गुना बढ़ा सकती है।






डॉनल्ड ट्रंप के लिए राह नहीं होगी आसान


लेकिन अमेरिका तो सिर्फ अब अपना पूरा ध्यान इस तेल की पॉलिटिक्स में लगा रहा है। ग्लोबल पॉलिटिक्स के जानकार कहते हैं कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने जो कहा था वो असल में दुनिया की राजनीति के पेट्रोल टैंक पर माचिस लगाने जैसा था। दरअसल ट्रंप ने कहा था कि वेनेज़ुएला अब अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल हाई क्वालिटी का तेल देगा और इसकी कीमत ट्रंप के कंट्रोल में होगी।


वहीं वेनेजुएला में इन्फ्रास्ट्रक्चर लड़खड़ाया हुआ है, रिफाइनरी जंग खा चुकी हैं। एक बैरल तेल निकालने में दो बैरल ऊर्जा लगती है। ऐसे में सामान्य तरीके से जो तेल पहले वेनेजुएला में निकाला जाता था उस लेवल को ही पाने में एक दशक का समय लग सकता है और अरबों डॉलर तक खर्च होंगे। अमेरिका चाहे लाख दावे कर ले लेकिन ये तेल रातों-रात दुनिया के बाजार में नहीं आ सकता। लेकिन अगर अमेरिका वेनेज़ुएला का तेल निकालना शुरु करता है। तो ये मानव इतिहास का सबसे बड़ा कार्बन विस्फोट हो सकता है। इससे जलवायु संकट सुपरफास्ट मोड में चला जाएगा। तेल की राजनीति एक ही सुपरपावर के इशारे पर नाचने लगेगी और पूरी दुनिया—ऊर्जा और पर्यावरण—दोनों मोर्चों पर बंध जाएगी। क्योंकि ये सिर्फ वेनेज़ुएला का तेल नहीं, बल्कि ग्लोबल पॉवर का नया हथियार है और इस हथियार का ट्रिगर अब अमेरिका के हाथ में है।


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