SUN, 30 NOVEMBER 2025

पाकिस्तान-परस्ती के चलते अमेरिका की झूठी रिपोर्ट: ऑपरेशन सिन्दूर में भारत को पाकिस्तान से हारा दिखाया, पहलगाम हमले को आतंकी नहीं, विद्रोही हमला कहा

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अंतरराष्ट्रीय
21 Nov 2025, 05:54 pm
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रिपोर्टर : Dushyant

बीते कुछ वक़्त से अमेरिका और भारत के रिश्तों में लगातार खटास बढती जा रही है। और ये सब तब से शुरू हुआ है, जब से डोनाल्ड ट्रम्प को अमेरिका की गद्दी मिली है। पहले भी ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान युद्ध रोकने का विवादित बयान देना और टैरिफ लागू करने जैसे कदम से अमेरिका और भारत की बीच में तनातनी शुरू हो चुकी है। हाल ही में अमेरिका ने एक और ऐसा कदम उठाया है, जो दोनों देशों की बीच के संबंधों में खासी दूरी और खटास पैदा कर चुका है।


USCC की विवादित रिपोर्ट: क्या कहा गया है भारत के खिलाफ?

अमेरिका के यूएस-चाइना इकॉनोमिक एंड सिक्यूरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) ने हाल ही में एक पूरी तरह से गलत, पक्षपाती, तथ्यहीन और विवादस्पद रिपोर्ट जारी की है, जिसमें लिखा गया है कि ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच चली 4 दिन की लड़ाई में पाकिस्तान की सेना ने जीत दर्ज की थी। चीन की बढ़ती ताकत पर नज़र रखने के लिए बनाए गए इस आयोग ने अपनी 800 पन्नों की इस रिपोर्ट को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है जैसे पाकिस्तान ने 4 दिनों की लड़ाई में चीनी हथियारों की मदद से भारत को पूरी तरह से हरा दिया हो। रिपोर्ट में पहलगाम हमले को भी 'आतंकी हमला' कहने की जगह 'विद्रोही हमला' बताया गया है, जिससे भारत की कूटनीति पर सवाल उठने लगे हैं। ये दावे न तो किसी भी स्रोत से प्रमाणित है, न ही भारत ने इसे स्वीकार किया है।

पाकिस्तान को बढ़ावा, भारत के तथ्यों की अनदेखी

रिपोर्ट में पाकिस्तान को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया और भारत की ऑफिशियल रिपोर्ट्स और तथ्यों को अनदेखा किया गया, जिससे साफ है कि रिपोर्ट का उद्देश्य कोई निगरानी रखना नहीं, बल्कि चीन-पाकिस्तान नैरेटिव को बढ़ावा देना है। ये आयोग पाकिस्तान के झूठी प्रोपेगैंडा को सच मानकर रिपोर्ट लिख रहा है। रिपोर्ट पढ़कर ऐसा लग रहा है जैसे इस रिपोर्ट को अमेरिका के आयोग ने नहीं, बल्कि पाकिस्तान ने लिखा हो।


झूठे दावे: विमानों को गिराने की पुष्टि

रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने चीनी हथियारों का भारी मात्र में इस्तेमाल किया था और भारत के लड़ाकू विमान गिराए थे। पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने राफेल समेत छह भारतीय विमानों को मार गिराया था। रिपोर्ट में भी तीन विमानों को गिराने की पुष्टि की गई है। ये पुष्टि भी बिना किसी सबूत के, बिना किसी आधार के की गयी है। इस कदम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राफेल की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की जा रही है।


हथियार बाजार बचाने की साजिश

यहाँ रिपोर्ट में इस तरह का झूठा तथ्य बताने की भी एक वजह है। वजह ये कि ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान भारत के द्वारा स्वदेशी तेजस और फ्रांस के राफेल जैसे लड़ाकू विमान इस्तेमाल किये गए थे। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान द्वारा एफ-16 जेट इस्तेमाल किये गए थे, जो अमेरिका बनाता और सप्लाई करता है। अगर अमेरिका ये तथ्य मानता है कि पाकिस्तान हार गया और इसके फाइटर जेट नष्ट कर दिए गए, तो इससे अमेरिका के हथियारों के एक्सपोर्ट पर बड़ा असर पड़ेगा। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के हथियारों और लड़ाकू विमानों की साख और कीमत गिर जाएगी और बिज़नस कम हो जायेगा। इसलिए अपना बाज़ार बचाने के लिए अमेरिका ऐसी झूठी रिपोर्ट निकाल रहा है, जिससे F-16 की साख बचे रहे और तेजस और राफेल जैसे जेट्स का नाम डुबोया जा सके।


चीनी हथियारों की मार्केटिंग का सुनहरा अवसर

रिपोर्ट का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के सहारे चीनी हथियारों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के रूप में दिखाने पर केंद्रित है। रिपोर्ट में कहा गया कि इस युद्ध को चीन ने एक सुनहरे अवसर की तरह काम में लिया है। चीन ने अपने लेटेस्ट हथियारों की फील्ड टेस्टिंग के लिए पाकिस्तान के ज़रिये इस युद्ध में हथियारों की टेस्टिंग की और साथ ही इंटरनेशनल मार्केट में मार्केटिंग की। पाकिस्तान ने चीन के HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम, PL-15 मिसाइलें और J-10 लड़ाकू विमानों का सहारा लिया।

भारत ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान को चीन से खुफिया जानकारी भी मिली थी, हालांकि पाकिस्तान ने इसे नकार दिया और चीन ने कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी। रिपोर्ट अनुसार 2019 से 2023 के बीच पाकिस्तान के 82 प्रतिशत हथियार चीन से ही इम्पोर्ट किये गए थे।


पहलगाम हमले का अपमानजनक वर्णन

भारत के लिए सबसे आपत्तिजनक भाग वह है; जिसमें पहलगाम हमला, जो पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकवादियों ने किया गया था — को आतंकवादी हमला न मानकर “विद्रोही कार्रवाई” कहा गया है। यह रिपोर्ट भारत में आतंकवाद से प्रभावित परिवारों व सुरक्षा बलों के बलिदान का अपमान करती है। USCC की यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की परिभाषा और असल स्थिति, दोनों के ख़िलाफ़ जाती है।


विपक्ष की कड़ी प्रतिक्रिया

विपक्षी दल इस रिपोर्ट को भारत के खिलाफ एक कूटनीतिक साजिश कूटनीतिक और हार बता रहा है। कांग्रेस ने सरकार से USCC की इस भ्रामक रिपोर्ट का कड़ा विरोध दर्ज करने की मांग की है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह रिपोर्ट हमारी विदेश नीति को करारा झटका है और सुरक्षा नैरेटिव को गलत ढंग से पेश करने की कोशिश है।

चीनी मीडिया का विरोध

वहीं, आश्चर्यजनक रूप से चीनी मीडिया ने भी इस रिपोर्ट को पक्षपाती बताया है। इससे यह और साबित होता है कि USCC और इसकी रिपोर्ट विश्लेषण से ज्यादा राजनीतिक दबाव और भ्रम फैलाने का जरिया है।


USCC का विवादित इतिहास

ये वही फर्जी कमीशन है जिसकी पोल पहले भी खुल चुकी है। इसे 2007 में अमेरिकी सरकारी ऑडिट में पकड़ा गया और ऑडिटर जनरल (GAO) ने कहा कि ये कमीशन फर्जी अकाउंट्स चलाता है, पैसों का घपला करता है, रिपोर्ट 5-5 महीने लेट देता है। 2006 में इन्होंने कहा था – चीन के पास दुनिया की सबसे खतरनाक सबमरीन फ्लीट है। बाद में अमेरिकी नेवी ने खुद माना था कि उन्होंने तो अनुमान लगाया था कि 40 सबमरीन पर रुक जाएगी।

2023-2024 में इन्होंने कहा कि चीन सप्लाई चेन को हथियार बना रहा है। इस पर चीन ने जवाब दिया था कि वो अमेरिका है, जो सप्लाई चेन को हथियार बनाता है। ये कमीशन हमेशा झूठ बोलती है। पूरी दुनिया जानती है ये Anti-China प्रोपेगैंडा मशीन है।


पारदर्शिता की कमी और भारत की स्थिति

USCC की रिपोर्ट में न तो पारदर्शिता है, न निष्पक्षता। भारत के सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार युद्ध संबंधी घटनाओं को लेकर जो दावा किया गया है, उसका वैश्विक स्तर पर कोई सत्यापन उपलब्ध नहीं है। रिपोर्ट में कई दावे पाकिस्तान के प्रोपेगंडा से मेल खाते हैं। ऐसा लगता है जैसे इन्होंने पाकिस्तान के झूठे प्रोपेगैंडा को सीधे कॉपी-पेस्ट कर दिया। साथ ही, आतंकवाद के लिए इस्तेमाल की गई शब्दावली अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन करती है।

ये जानबूझकर दुनिया के सामने भारत को नीचा दिखाने की कोशिश है। क्या इस रिपोर्ट में एक भी भारतीय सैन्य अधिकारी का बयान है? नहीं। एक भी भारतीय खुफिया एजेंसी का इनपुट है? नहीं। भारत का मानना है कि यह रिपोर्ट न तो तथ्यों पर आधारित है और न ही भारत की युद्ध क्षमता और सुरक्षा को दर्शाती है।


पिछली बार भी जब ट्रम्प ने भारत के खिलाफ टैरिफ वॉर शुरू किया था, तब भारत और अमेरिका के बीच बिज़नस डीलिंग कम हो गयी थी, जिसका अमेरिका की इकॉनमी पर कुछ वक़्त के लिए प्रभाव रहा था। अब एक बार फिर अमेरिका ने ये नीच हरकत की है। क्या प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय इसका विरोध जताएंगे? सरकार को इस पर तुरंत आपत्ति दर्ज करती बताया है।


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