सिटी पैलेस से आज निकलेगी बूढ़ी गणगौर की सवारी, जानें क्या रहेगा रूट?

Gangaur: जयपुर में गणगौर की धूम मची हुई है। 21 मार्च को सिटी पैलेस में गणगौर का भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसने ना सिर्फ गणगौर शोभायात्रा (Jaipur Gangaur Sawari) में चार चांद लगाए बल्कि इसकी भव्यता, परंपरा, संस्कृति की छटा को इतना बिखेर दिया कि लोगों के सिर से इसका खुमार उतर ही नहीं रहा है। अब रविवार को बूढ़ी गणगौर की शोभायात्रा के साथ इसका समापन होगा।

ये रहेगा शोभायात्रा का रूट
रविवार को बूढ़ी गणगौर की शाही सवारी के साथ यह महोत्सव समाप्त हो जाएगा। पर्यटन विभाग के उप निदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत के मुताबिक बूढ़ी गणगौर की सवारी रविवार शाम 5:45 बजे सिटी पैलेस से रवाना होगी। यहां से पारंपरिक मार्ग त्रिपोलिया गेट, छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार से गुजरते हुए तालकटोरा तक पहुंचेगी।
जयपुर में गणगौर की सवारी
जनता की जबर्दस्त भागीदारी और न जाने कितनी कलाओं का प्रदर्शन एक साथ pic.twitter.com/9MKK13qMpQ
— Arvind Chotia (@arvindchotia) March 22, 2026
क्यों निकाली जाती है बूढ़ी गणगौर की सवारी
बता दें कि बूढ़ी गणगौर की सवारी को खास तौर पर विदाई और परंपरा के चरम रूप में देखा जाता है। जिसमें लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का गहरा भाव दिखाई देता है। जयपुर एक बार फिर इस ऐतिहासिक परंपरा का साक्षी बनेगा। बूढ़ी गणगौर विवाहित महिलाओं की आस्था और सौभाग्य का प्रतीक माना जाती है। ये शिव-पार्वती के पुनर्मिलन की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति

गणगौर शोभायात्रा में उमड़ी लाखों की भीड़
बीते शनिवार को नगाड़ों की गूंज, शहनाई की मधुर तान के बीच गणगौर माता की सवारी निकली। हजारों लाखों लोगों की भीड़ इस भव्य और शाही सवारी को देखने के लिए परकोटे में पहुंची थी। उन्होंने गौर माता की जय के जयकारे लगाए। गणगौर माता की सवारी का पुष्पवर्षा कर उसका स्वागत किया। इस सांस्कृतिक झलकियों को कैमरा में कैद करते विदेशी पर्यटक भी नजर आए।

लोक कलाकारों ने बिखेरी सांस्कृतिक छंटा
गणगौर शोभायात्रा में शामिल 210 लोक कलाकारों ने आयोजन को जीवंत बना दिया। कच्छी घोड़ी, गैर, कालबेलिया, चरी और घूमर जैसे लोकनृत्यों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं रावणहत्था, भपंग और शहनाई की धुनों ने पूरे माहौल को गीत-संगीत में पिरो दिया। इस बार 32 पारंपरिक लवाजमों की भव्य मौजूदगी ने सवारी को और भी आकर्षक बना दिया। सजे हुए हाथी, ऊंट दल, घोड़े, विक्टोरिया कैरिज और विभिन्न बैंडों की धुनों के बीच पहली बार शामिल शंकर बैंड ने खास आकर्षण पैदा किया।
इस लिंक को शेयर करें

