राज्य सरकार को Rajasthan Highcourt से बड़ी राहत, ओबीसी सूची संशोधन में देरी पर दायर अवमानना याचिका खारिज

ओबीसी सूची संशोधन (OBC List Revision) को लेकर कोर्ट के आदेशों की पालना नहीं करने को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ दायर अवमानना याचिका में सरकार को बड़ी राहत मिली है। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) सूची के पुनरीक्षण में देरी को लेकर दायर दो सिविल अवमानना याचिकाओं को खारिज कर दिया।
JUSTICE VINIT KUMAR MATHUR और JUSTICE RAVI CHIRANIA की खंडपीठ ने सरकार को राहत देते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा दिए गए तर्कों के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि अदालत के 2015 के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन (Willful Disobedience) नहीं हुआ है।
हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया वर्तमान संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है और इसे अदालत के आदेश की ‘हठपूर्वक अवहेलना’ नहीं माना जा सकता।
ये है मामला
10 अगस्त 2015 को सन 1993 के राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम (NCBC Act 1993) और सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1993) के आधार पर राजस्थान हाईकोर्ट ने ओबीसी सूची की दस वर्ष में एक बार पुनरीक्षण (Revision) का आदेश दिया था।
इसी आदेश की पालना में हाईकोर्ट में यशवर्धन सिंह शेखावत व अन्य ने अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि वर्ष 2015 में हाईकोर्ट ने ओबीसी वर्ग की सूची में अतिशामिल (Over Inclusion) और अल्पशामिल (Under Inclusion) समूहों की विस्तृत समीक्षा और संशोधन करने का आदेश दिया था।
इस लिंक को शेयर करें