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Uranium in Breast Milk: बिहार: माँ के दूध में मिला रेडियोएक्टिव यूरेनियम, महिलाओं की स्टडी में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

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राष्ट्रीय
27 Nov 2025, 02:58 pm
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रिपोर्टर : Dushyant

Bihar: Uranium in Breast Milk: एक नवजात शिशु के लिए ज़रूरी सबसे सुरक्षित और पौष्टिक आहार मां का दूध होता है। लेकिन क्या हो, अगर माँ का दूध ही धीरे-धीरे ज़हर में बदलने लग जाए? बिहार की 40 महिलाओं पर की गयी एक स्टडी में महिलाओं के ब्रेस्ट मिल्क में रेडियोएक्टिव यूरेनियम पाया गया है। ये यूरेनियम ऑर्गन फेलियर, कैंसर और डीएनए डिसऑर्डर जैसी कई गंभीर बीमारियाँ कर सकता है। ये वही यूरेनियम है, जिसका इस्तेमाल न्यूक्लीयर बम बनाने में किया जाता है। लेकिन ये यूरेनियम महिलाओं के ब्रेस्ट मिल्क में पहुंचा कैसे?


हाल ही में, दिल्ली एम्स, पटना के महावीर कैंसर संस्थान और वैशाली के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च समेत पांच संस्थानों ने मिलकर बिहार के छह जिलों में 17 से 35 साल की 40 महिलाओं पर एक स्टडी की, जिसमें महिलाओं के ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम पाया गया है। साथ ही, इन महिलाओं के बच्चे, जिन्हें स्तनपान कराया गया था, उन 70 फीसदी बच्चों के शरीर में भी यूरेनियम पाया गया है। डॉक्टरों ने कहा है कि इस प्रकार यूरेनियम के शरीर में जाने से नॉन कार्सिनोजेनिक डिजीज जैसे किडनी, नर्वस सिस्टम और मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ सकती है।


रिपोर्ट्स के अनुसार ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम पहुँचने का कारण है उस क्षेत्र पीने के पानी और खेतों में उगा अनाज, क्योंकि बिहार के ग्यारह और देश भर के 151 जिलों के ग्राउंड वाटर में यूरेनियम मौजूद है। यूरेनियम एक ऐसा तत्व है, जो प्राकृतिक तौर पर धरती की ऊपरी सतह और चट्टानों में मिलता है, जहां से यह मिट्टी और नदियों में मिल जाता है। लेकिन अब केमिकल के इस्तेमाल और प्रदूषण के चलते इसकी मात्रा बढती जा रही है।


आम तौर पर एक भारतीय के शरीर में रोजाना औसत 1-5 माइक्रोग्राम यूरेनियम जाता है। WHO के स्टैंडर्ड्स के अनुसार 30 माइक्रोग्राम यूरेनियम प्रति लीटर पीया जा सकता है और एक सामान्य व्यक्ति एक दिन में अधिकतम 50-60 माइक्रोग्राम यूरेनियम की सुरक्षित सीमा में सेवन कर सकता है। लेकिन इतनी मात्रा में यूरेनियम को हमारा शरीर आसानी से बाहर निकाल देता है। जो थोडा हिस्सा कुछ बचता है, वो हड्डियों में जमा हो जाता है। सीमा से ज्यादा हो जाने पर यूरेनियम सबसे पहले किडनी पर असर करता है।


स्टडी के दौरान ब्रेस्ट मिल्क में मिले यूरेनियम की मात्रा 1-5.25 माइक्रोग्राम पायी गयी है, जो सुरक्षा सीमा के अन्दर है। इसलिए, डॉक्टर्स अभी के लिए ब्रेस्ट मिल्क में मिले यूरेनियम को गंभीर चिंता नहीं बता रहे हैं। डॉक्टर्स ने महिलाओं के ब्रेस्ट फीडिंग पर भी कोई रोक नहीं लगाई है। लेकिन, इस स्टडी के बाद देश भर में कई डॉक्टर्स अब इसे अधूरा या गलत ठहरा रहे हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि ये स्टडी सिर्फ 40 लोगों पर की गयी है, जो किसी भी स्टडी या पैमाने के लिए बहुत छोटी संख्या है। सिर्फ 40 महिलाओं पर की गयी स्टडी आधार पर पूरे क्षेत्र को नहीं नापा जा सकता। इसलिए एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस स्टडी को पूरे राज्य या देश में बड़े पैमाने पर किया जाना चाहिए, ताकि जिन-जिन जगहों पर पानी या भोजन में यूरेनियम सुरक्षित सीमा से अधिक है, वहां पर सुरक्षा और उपचार के लिए ठोस कदम उठाये जाये, इससे पहले कि स्थिति सच में गंभीर हो जाये।


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