दौसा में फूटा सियासी बम! किरोड़ीलाल मीणा पर शंकरलाल शर्मा का सीधा वार! क्या खफा हैं BJP के नेता?

Rajasthan Politics: दौसा में बीजेपी की अंदरूनी लड़ाई अब सड़क पर नहीं मंचों पर गूंजने लगी है। पूर्व विधायक शंकरलाल शर्मा ने अपने शब्दों से ऐसी चोट की है कि यहां मौजूद नेता भी समझ गए कि ये कोई साधारण बयान नहीं है, ये सीधा प्रहार है। दरअसल दौसा के रामगढ़ पचवाड़ा के भगवान परशुराम मंदिर में ब्राह्मण महासंगम चल रहा था। यहां पर मंच पर खड़े शंकरलाल शर्मा ने ऐसा विस्फोटक बयान दे दिया कि अब बीजेपी में हलचल मच गई है। उन्होंने दौसा उपचुनाव में बीजेपी की हार पर तंज कसते हुए कहा कि दौसा के युवाओं ने एकता दिखाई और बीजेपी को हरा दिया।
बिना नाम लिए किरोड़ी लाल मीणा पर कसा तंज
शंकरलाल शर्मा ने बस नाम ही नहीं लिया बाकी उनका निशाना सबने समझ लिया। जो था कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के भाई जगमोहन मीणा पर जो 2024 का दौसा उपचुनाव हार गए थे। इसी हार को शंकरलाल ने युवाओं की ‘एकता’ बता डाला। यानी संदेश साफ था कि अपनी-अपनी लड़ाइयों और अहंकार ने पार्टी को डुबा दिया। क्योंकि उन्होंने मंच से कहा कि जब सब लोग अपनी-अपनी जाति और समाज कर रहे हैं। तो अब ब्राह्मण क्यों नहीं? क्य़ों हम अपनी जात-बिरदरी देखें? हम आने वाली पीढ़ी के लिए क्या छोड़कर जाएंगे?
‘युद्ध लड़कर जाऊंगा तो शहीद कहलाऊंगा’
शंकर लाल शर्मा ने यहां एक और बात कही कि वो अब 70 साल के हो गए। अब युद्ध लड़कर ही जाऊंगा तो शहीद कहलाऊंगा। शंकरलाल यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि पहले विधानसभा में 60 ब्राह्मण विधायक होते थे पर अब गिने-चुने ही क्यों रहे गए हैं, क्योंकि ‘एकता खत्म’ हो गई। उन्होंने सीधे सवाल दागा कि क्या सबको साथ लेने का ठेका हमने ही ले रखा है। शंकर लाल का ये बयान साफ बताता है कि ब्राह्मण समाज के भीतर भी सियासी नाराजगी अब उबाल पर है, वो भी तब जब भजनलाल शर्मा के रूप में एक ब्राह्मण प्रदेश का मुख्यमंत्री है।
इसमें सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि लालसोट विधायक रामविलास मीणा ने भी शर्मा की बातों को समर्थन दिया। उन्होंने 2018 और 2023 का किस्सा याद दिलाते हुए कहा कि ब्राह्मण की दृष्टि शुभ होती है। 2018 में मेरे पर कुदृष्टि थी और जब 2023 में नजर पड़ी तो सारी कसर निकल गई। इसके साथ उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भी सियासी माहौल बदलने का क्रेडिट भी दे डाला।
बीजेपी पर खड़े हुए बड़े सवाल
अब बड़ा सवाल ये है कि बीजेपी में आखिर चल क्या रहा है। पहले शंकरलाल का टिकट कटा फिर किरोड़ी के भाई को टिकट मिला और वो भी हार गए। इस पर भी किरोड़ीलाल मीणा का दर्द सामने आया था। उन्होंने तब कहा था कि हमें अभिमन्यु की तरह घेरकर मारा गया। कुछ जयचंदों ने रास्ता भूलवा दिया। यानी इतना तय है कि दौसा की राजनीति में तूफान आ चुका है और इसकी गूंज जयपुर तक जाती हुई नजर आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये बीजेपी की अंदरूनी टूट का संकेत है? क्या शंकरलाल शर्मा की नाराजगी आने वाले चुनावों में बड़ा फैक्टर बन सकती है?
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