THU, 15 JANUARY 2026

23 महीने में ही मालवीय को हुआ बीजेपी से मोहभंग, ऐसा कौन सा सपना पूरा नहीं कर पाई पार्टी?

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राजस्थान
12 Jan 2026, 12:46 pm
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रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Rajasthan Politics: राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। वागड़ अंचल के कद्दावर आदिवासी नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने भारतीय जनता पार्टी को अलविदा कहकर कांग्रेस में वापसी का ऐलान कर दिया है। सवाल बड़ा है कि क्या भाजपा उन्हें रास नहीं आई? क्या उन्हें वो सम्मान और भूमिका नहीं मिली, जिसकी उन्हें उम्मीद थी?


23 महीने में ही बीजेपी से हुआ मोहभंग


दरअसल, महेंद्रजीत सिंह मालवीय महज 23 महीने पहले ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। उस वक्त उन्होंने कहा था कि राज्य और केंद्र—दोनों जगह भाजपा की सरकार होने से वागड़ क्षेत्र का विकास तेजी से होगा। इसी उम्मीद के साथ उन्होंने भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। इसी हार के बाद से भाजपा में उनकी भूमिका सीमित होती चली गई। खुद मालवीय का कहना है कि भाजपा में रहते हुए उन्हें लगातार यह महसूस हुआ कि गरीब, किसान और आदिवासी समाज की समस्याओं को लेकर कोई गंभीर सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखे, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस रहे। यही वजह है कि उन्होंने भाजपा छोड़ते हुए अपने पत्र में साफ शब्दों में लिखा कि “भाजपा में मेरा दम घुट रहा है।” उन्होंने भाजपा में जाना एक “ऐतिहासिक भूल” बताया।






रंधावा, डोटासरा और जूली से मालवीया ने की मुलाकात


रविवार सुबह जयपुर के कांस्टीट्यूशन क्लब में इस पूरे घटनाक्रम ने निर्णायक मोड़ लिया। यहां मालवीय ने कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से मुलाकात की। इसके बाद मीडिया के सामने उन्होंने स्पष्ट कहा— “मैं कांग्रेस में वापस आ चुका हूं, आज से फिर कांग्रेस का सिपाही हूं।” यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है, जब वागड़ क्षेत्र में आदिवासी राजनीति तेज़ी से बदल रही है। बांसवाड़ा से राजकुमार रोत जैसे युवा आदिवासी नेताओं का उभार, भाजपा के लिए पहले ही चुनौती बना हुआ है। ऐसे में महेंद्रजीत मालवीय का भाजपा छोड़ना यह संकेत देता है कि पार्टी अब भी वागड़ के आदिवासी वोट बैंक में स्थायी पकड़ नहीं बना पाई है।


पंचायत निकाय चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ा झटका


भाजपा ने मालवीय को कांग्रेस के आदिवासी आधार में सेंध लगाने के उद्देश्य से शामिल किया था, लेकिन लोकसभा चुनाव में हार और अब पार्टी छोड़ना—इस रणनीति की विफलता को उजागर करता है। आगामी पंचायत और निकाय चुनावों से पहले यह भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वहीं कांग्रेस के लिए मालवीय की वापसी सिर्फ एक नेता की घर वापसी नहीं, बल्कि आदिवासी राजनीति में मनोवैज्ञानिक बढ़त के तौर पर देखी जा रही है। चार दशकों से अधिक के राजनीतिक अनुभव वाले मालवीय सरपंच से लेकर सांसद, विधायक, जिला प्रमुख और मंत्री तक रह चुके हैं। वागड़ के आदिवासी समाज में उनका प्रभाव आज भी कायम है।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने उनके पत्र की पुष्टि करते हुए कहा है कि अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान करेगा। लेकिन इतना तय है कि मालवीय की वापसी ने यह संदेश जरूर दे दिया है कि भाजपा में गए बड़े आदिवासी चेहरे भी वहां खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि राजकुमार रोत जैसे आदिवासी नेताओं के बीच कांग्रेस महेंद्रजीत मालवीय को किस भूमिका में आगे बढ़ाती है—और क्या यह वापसी वागड़ की राजनीति की दिशा बदल पाएगी।


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