सर्दी-जुकाम में दही और घी खाना सही या गलत? जानिए सच और अफवाह का फर्क

सर्दियों का मौसम शुरू होते ही सर्दी-जुकाम और खांसी की समस्या आम हो जाती है। ऐसे में अधिकतर घरों में खान-पान को लेकर कई तरह की पाबंदियां लगा दी जाती हैं। खासतौर पर दही और घी को लेकर यह धारणा प्रचलित है कि सर्दी-जुकाम में इनका सेवन नुकसानदायक होता है। लेकिन क्या वाकई ऐसा है, या यह सिर्फ एक पुरानी अफवाह? आइए जानते हैं इसका वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक सच।
दही और घी से जुकाम बढ़ता है?
अक्सर माना जाता है कि दही और घी खाने से सर्दी-जुकाम बढ़ जाता है। हालांकि डॉक्टरों और आयुर्वेद विशेषज्ञों की मानें तो यह पूरी तरह सही नहीं है। सर्दी-जुकाम में दही और घी को पूरी तरह छोड़ देना किसी समस्या का समाधान नहीं है। जरूरी यह है कि इनका सेवन सही तरीके और सही समय पर किया जाए।
सर्दी-जुकाम में दही खाने का सही तरीका
दही को लेकर सबसे बड़ा मिथक यही है कि इसे खाने से जुकाम हो जाता है। जबकि दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करते हैं और पाचन तंत्र को बेहतर बनाते हैं।
हालांकि फ्रिज से निकला ठंडा दही खाने से गले में जलन और बलगम की समस्या बढ़ सकती है। आयुर्वेद के अनुसार दही कफ बढ़ाने वाला होता है, इसलिए ज्यादा बलगम वाली खांसी में ठंडा दही नहीं खाना चाहिए।
अगर सर्दी-जुकाम के दौरान दही खाना हो तो उसे सामान्य तापमान पर रखें और उसमें काली मिर्च या भुना हुआ जीरा मिलाकर सेवन करें।
घी भी है फायदेमंद
कई लोगों को लगता है कि सर्दी-जुकाम में घी खाने से समस्या बढ़ जाती है, लेकिन यह धारणा भी पूरी तरह गलत है। घी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो गले की खराश को कम करने और श्वसन मार्ग को चिकनाहट देने में मदद करते हैं। सही मात्रा और सही तरीके से लिया गया घी सर्दी-जुकाम में औषधि की तरह काम कर सकता है।
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