THU, 05 FEBRUARY 2026

सोशल मीडिया हमें इस्तेमाल कर रहा है या हम उसे? जानिए क्यों जरूरी हो गया है सोशल मीडिया डिटॉक्स - फायदे और आसान तरीके

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लाइफ स्टाइल
04 Feb 2026, 06:52 pm
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रिपोर्टर : Kriti Kumari

क्यों जरुरी हो गया है, सोशल मीडिया से थोड़ी दूरी बनाना (Social Media Detox)?


सवाल यह है कि हम सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे या सोशल मीडिया हमारा? इसी के जवाब के लिए आज हमें “सोशल मीडिया डिटॉक्स” के बारे में सोचना जरुरी हो जाता है।


आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में सोशल मीडिया हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। सुबह का पहला काम ही नोटिफिकेशन चेक करना हो गया है और कई बार हम नोटिफिकेशन चेक करने के बाद बेवजह का स्क्रॉल करना शुरु कर देते हैं। कई बार तो ऐसा होता है कि लोग सोने से पहले एक आख़िरी बार सोशल मिडिया चेक करने जाते हैं और भूल जाते हैं कि वे कितनी देर से लगातार मोबाइल ही चला रहे हैं। ये सब हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है और इन्हीं सब आदतों की वजह से आजकल लोगों में नींद से जुड़ी बीमारियों का होना आम-सा हो गया है।


क्या है सोशल मीडिया डिटॉक्स (What is Social Media Detox)?


डिटॉक्स का मतलब है कुछ समय के लिए उस चीज से दूरी बनाना, जिसकी आपको आदत-सी हो रही है और वो आप पर हावी होता जा रहा है। इस समय में हम उन चीजों के इस्तेमाल को सीमित कर देते हैं, ताकि मस्तिष्क को शांति मिल सकें और फोकस बढ़े। और तो और, इस बीच हम अपनी वास्तविक ज़िंदगी पर ज्यादा ध्यान देते हैं। इसलिए जब बात सोशल मीडिया डिटॉक्स की आती है, तो हम ऐसे सारे उपकरणों से दूर रहते हैं, जो हमारा ध्यान भटकाने का काम करते हैं। इसमें हम पूरी तरह सोशल मीडिया को नहीं छोड़ते, लेकिन उसको कब, कैसे, कितना इस्तेमाल करना है, उसपर अपना कंट्रोल बनाने की कोशिश करते है।


डिटॉक्स की जरुरत कब पड़ती है? (When Social Media Detox is necessary)


अक्सर लोग समझ नहीं पाते कि उन्हें कब सोशल मीडिया से दूरी बनाने की ज़रुरत है। इसलिए हम कुछ ऐसे संकेतों की बात करेंगे, जिससे आप समझ पाएँगें की कब-कब आपको सोशल मीडिया डिटॉक्स की जरुरत पड़ती है।

• बेवजह बार-बार नोटिफिकेशन चेक करना।

• सोशल मीडिया पर लोगों की लाईफ देखकर खुद की लाईफ से कंपेयर करना।

• हमेशा लाइक्स, व्यूज़ और कमेंट्स के बारे में ही सोचना और इससे आपके मूड का प्रभावित होना।

• बेवजह हमेशा थका-थका रहना, बेचैनी और फोकस की कमी जैसे लक्षण महसूस करना।

• सोने से पहले और उठते ही सबसे पहले फोन देखना।

• वास्तविक ज़िंदगी में दिलचस्पी का ना होना।


अगर इनमें से ज़्यादातर बातें आपके के साथ रोज हो रही, तो आपको सोशल मीडिया डिटॉक्स की जरुरत है।


सोशल डिटॉक्स के फायदे- (Benefits of Social Media Detox)


लोगों को जिस तरह सोशल मीडिया की आदत लग चुकी है, उन्हें लगता है कि उनका सोशल मीडिया से दूर होना काफी कठिन है। लेकिन ऐसा नहीं है। यह काफी आसान है और इसके काफी फायदे भी है, जो धीरे-धीरे दिखते हैं। आइए मैं आपको इसके कुछ फायदे बताती हूँ।


• सोशल मीडिया पर बहुत सारी चीजें हैं, जिनमें से कुछ अच्छी तो कुछ बहुत बुरी भी होती है। जिससे दिमाग हमेशा तनाव से घिरा रहता है, और जब हम सोशल मीडिया डिटॉक्स करते हैं, तो दिमाग को काफी शांति मिलती और तनाव भी कम होता है।

• हर मिनट नोटिफिकेशन चेक करने की आदत और पूरे दिन स्क्रॉल करते रहने की वजह से, और क्योंकि सोशल मीडिया का कंटेंट काफी कम समय का होता है, इसलिए लगातार छोटे कंटेंट देखते-देखते हमारी फोकस करने की क्षमता कम होती चली जाती है। और जब हम डिटॉक्स करते हैं, तो यह हमारी फोकस को वापस से सही करने में काफी मददगार साबित होता है, जिसे हम सही जगह इस्तेमाल कर सकते हैं।

• सोशल मीडिया पर दूसरों की सो-कॉल्ड “परफेक्ट” लाईफ देख-देख कर, खुद को कम समझने लग जाते हैं, जिससे समय के साथ-साथ हमारा आत्मविश्वास भी कम होने लग जाता है। इसलिए, जब हम डिटॉक्स करते हैं, तो ये हमारा आत्मविश्वास वापस से बढ़ाने में मदद करता है।

• जब हम दिनभर सिर्फ फोन में लगे रहते हैं, तो अपने रिश्तों को समय देना भूल जाते हैं। जब हम डिटॉक्स करते हैं, तो उस समय अपने परिवार और दोस्तों को सही समय देते हैं, जिससे हमारे रिश्ते भी अच्छे होते है।

• जब हम डिटॉक्स करते हैं और फोन से दूरी बनाते हैं, तो ये हमें समय पर सोने में मदद करता है, जिससे हमारी नींद की क्वालिटी भी इम्प्रूव होती है, जो हमें अच्छा महसूस करने में मदद करती है।


सोशल मीडिया को सही तरीके से कैसे इस्तेमाल करें? (How to use social media properly)


आज के दौर में क्योंकि सोशल मीडिया हमारी जरुरत बन गई है, इसलिए हम पूरी तरह से इसे छोड़ भी नहीं सकते, लेकिन कुछ अच्छी आदतें अपना कर इसके द्वारा इस्तेमाल होने से बच सकते हैं। तो आइए जानते है कि हेल्दी ऑनलाइन आदतें कैसे बनाएं.. (digital detox tips)


• दिन में सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए एक समय तय कर लें और बेवजह की नोटिफिकेशन को बंद रखें।

• फोन को बिस्तर से दूर रखें ताकि सुबह उठते ही और सोने से पहले फोन ना देखें।

• हर पोस्ट और हर नोटिफिकेशन का जबाव देना जरुरी नहीं है, इसलिए खुद को ब्रेक दें और अपने दिमाग को सुकून दें।

• हफ्ते में कम से कम एक दिन ऐसा जरुर रखें जब आप सोशल मीडिया से दूर रहें। यही सब छोटी-छोटी आदतें धीरे-धीरे बड़े बदलाव लाने में मदद करते हैं।


कैसे डिसाइड करें कि कौन-सा कंटेंट देखना चाहिए? (How to select content)


जैसे हम अपनी लाईफ की हर चीज डिसाइड करते हैं, उसी तरह, हम क्या देख रहे हैं, उस बारे में भी सोचना ज़रूरी हो जाता है, क्योंकि हमारा दिमाग हमारे लिए बहुत ज़रूरी है और हमें ध्यान होना चाहिए कि हम अपने दिमाग में क्या फीड कर रहे हैं।


• ध्यान रखें कि जो भी हम देख रहे हैं, वो हमें कुछ न कुछ जानकारी दे रहा है, प्रेरणादायक है और हमें पॉजिटिव रहने में मदद करता हो।

• नेगेटिव, हिंसक, डिमोटिवेटिंग कंटेंट से दूर रहें।

• ट्रेंड को फॉलो करने के चक्कर में ना रहें।

• ध्यान रखें कि सोशल मीडिया पर मौजूद हर चीज़ सही नहीं होती। तो इन सब चीजों से दूर रहें।


माइंडफुल होकर कंटेंट देखने से हमारा जीवन बेहतर होने लग जाता है।


आखिर में यही कहेंगे कि सोशल मीडिया बुरा नहीं है, लेकिन उसका ज़रूरत से ज़्यादा और बिना सोचे-समझे इस्तेमाल हम सब पर बुरा प्रभाव डालता है। सोशल मीडिया डिटॉक्स हमारे लिए जरुरी है, जिससे हमें याद रहे कि असली ज़िंदगी स्क्रीन में नहीं बल्कि स्क्रीन के बाहर है - जहाँ शांति, सुकून, रिश्ते और आप खुद हैं। याद रखें कि हम सोशल मीडिया को सिर्फ अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना सकते हैं, पूरी ज़िंदगी नहीं।



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