क्या कर रहीं JJM-अमृत योजना? आजादी के 75 साल बाद भी पीने के लिए साफ पानी नहीं- इंदौर-राजस्थान के दूषित पेयजल को लेकर बोले बेनीवाल

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल से बड़े स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया है। देश की सबसे स्वच्छ शहर मानी जाने वाली इंदौर में भगीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से डायरिया का प्रकोप फैला जिससे कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई और 1100 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें से भी 32 लोग ICU में हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। इसे लेकर अब नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने बड़ा सवाल सरकार से किया है। उन्होंने ना सिर्फ इंदौर की घटना पर सवाल उठाए बल्कि राजस्थान में आ रही पानी की कमी और गंदे पानी की घटनाओं का भी जिक्र किया।
क्या कहा बेनीवाल ने?
इस मुद्दे पर राजस्थान के नागौर से सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नेता हनुमान बेनीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में एमपी सरकार को घेरते हुए कहा कि इंदौर जैसे विकसित शहर में दूषित पानी से मौतें होना शर्मनाक है और ये प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण है। बेनीवाल ने प्रधानमंत्री कार्यालय और मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री को टैग करते हुए लिखा कि ये हादसा नहीं, बल्कि सरकार की विफलता है।
इस पोस्ट में उन्होंने पूरे देश में दूषित पेयजल की समस्या को उठाया, जिसमें राजस्थान सहित कई राज्यों में फ्लोराइड, आर्सेनिक और रासायनिक तत्वों से युक्त पानी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में इंदौर में दूषित पानी से कई लोग मौत के मुंह में समा गए, और लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। बेनीवाल ने केंद्र की जल जीवन मिशन (JJM) और अमृत योजना पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि राज्य सरकारों से संवाद कर इस संकट का स्थाई समाधान निकाला जाए।
लोकसभा में भी प्रदूषित पानी का मुद्दा उठा चुके हैं बेनीवाल
आपको बता दें कि बेनीवाल पहले भी लोकसभा में राजस्थान की नदियों और नहरों में प्रदूषण का मुद्दा उठा चुके हैं। इसके अलावा उनका एक बयान भी सामने आया है जिसमे वो सरकार की विफलता बताते हुए कहते हैं कि "आजादी के 75 साल बाद लोगों को पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिल रहा दूषित पानी के साथ वह अपना जीवन यापन कर रहे हैं। सरकार के जल जीवन मिशन का उद्देश्य 2024 तक हर घर में नल से जल पहुंचाना था, लेकिन 2026 में भी कई इलाकों में पानी की गुणवत्ता एक बड़ी समस्या बनी हुई है। अमृत योजना शहरों में जल आपूर्ति और सीवेज प्रबंधन पर फोकस करती है, लेकिन इंदौर जैसी घटनाएं इन योजनाओं की हकीकत बयां करती हैं। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने भी इस पर राज्य सरकार को घेरा है और मौतों की संख्या छिपाने का आरोप लगाया।
अब तक 16 की मौत
दरअसल, इंदौर के भगीरथपुरा में सीवेज का पानी पीने के पानी की लाइनों में मिल जाने से यह संकट पैदा हुआ। लैब टेस्ट में पुष्टि हुई कि पानी में हानिकारक बैक्टीरिया मौजूद थे, जिससे डायरिया, उल्टी और गंभीर डिहाइड्रेशन के मामले बढ़े। अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है और 1100 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हैं। एक दिल दहला देने वाली कहानी है एक परिवार की, जहां 10 साल बाद जन्मे शिशु की दूषित पानी से मौत हो गई, और परिवार ने सरकारी मुआवजे को ठुकरा दिया। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर हाई-लेवल मीटिंग हुई और नगर निगम कमिश्नर और एडिशनल कमिश्नर को हटा दिया गया। वहीं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी इस मुद्दे पर सुनवाई हुई जिसके बाद कोर्ट ने निगम और सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है।
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