14 फरवरी: प्यार का दिन नहीं… 40 घरों का मातम! पुलवामा का सच जो रूह कंपा दे

14 फरवरी: प्यार का दिन नहीं… 40 घरों का मातम! पुलवामा का सच जो रूह कंपा दे
राष्ट्रीय
14 Feb 2026, 11:43 am
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

Black Day: 14 फरवरी को दुनिया भर में प्यार का दिन, वैलेंटाइन डे (Valentine’s day) मनाते हैं। लोगों के लिए 2019 से पहले 14 फरवरी मतलब था- फूल, टेडी, चॉकलेट, रोमांस। लेकिन 14 फरवरी 2019 को भारत की सड़कें रंगों में नहीं, खून में रंग गई थीं। भारत के करोड़ों दिलों के लिए ये दिन लाल नहीं बल्कि काला है। 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने ऐसा गहरा जख्म दिया कि 14 फरवरी (14 February Black Day) का जश्न एक ब्लैक डे में बदल गया। 40 जवानों के घरों में मातम छा गया। किसी की मांग का सिंदूर मिट गया, किसी माँ का सहारा चला गया, किसी बच्चे के सिर से पिता का हाथ हमेशा के लिए उठ गया, उस एक दिन आतंकियों ने 40 परिवारों की खुशियां छीन लीं।

विस्फोटक से भरी कार को बस से टकराया

जब दोपहर के 3 बजकर 10 मिनट पर जम्मू-कश्मीर हाईवे पर CRPF की 78 गाड़ियों का लंबा काफिला (Pulwama Attack) जा रहा था। इसमें 2500 से ज्यादा जवान सफर पर थे और फिर एक तेज दौड़ती कार काफिले की तरफ झपटी। इस कार में भरा था 300 किलो से भी ज्यादा RDX. बस से टकराते ही ऐसा धमाका हुआ कि कई किलोमीटर तक धरती हिल गई। बस के परखच्चे उड़ गए। पूरा इलाका धुएं और आग में घिर गया। सड़कें काली और लाल हो गईं थीं। जवानों के जूते, बैग, हथियार सब बिखरे पड़े थे। उस दिन 40 से ज्यादा वीर बेटे भारत मां के लिए कुर्बान हो गए थे।

भारत ने बालाकोट स्ट्राइक

ये सिर्फ हमला नहीं था। ये भारत की रूह पर वार था। इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। जो पाकिस्तान की जमीन पर पलने वाला आतंकी संगठन था। लेकिन इस बार भारत चुप नहीं रहा। हमले के ठीक 12 दिन बाद 25 फरवरी की रात को भारत ने इस हमले का जवाब दिया। वो भी सीधा पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर देश की वायुसेना ने जैश के ठिकानों पर सटीक निशाना लगाकर लगभग 300 आतंकियों को ढेर किया। ये सिर्फ हमला नहीं था, ये एक कड़ा संदेश था कि भारत को चुनौती दोगे, तो कीमत चुकानी पड़ेगी।

इसलिए 14 फरवरी को ब्लैक डे हमें ये याद दिलाता है कि हमारी सुरक्षा किस कीमत पर मिलती है। उन 40 परिवारों का दर्द, उन वीरों के नाम, जिन्होंने देश के लिए अपनी आखिरी सांस दी। आज अगर हम चैन से घरों में सोते हैं, तो इसलिए क्योंकि बॉर्डर पर कोई जवान। अपनी नींद अपनी जान की कुर्बानी देता है और पुलवामा का दिन हमें ये सच्चाई हमेशा याद दिलाता है। पुलवामा के शहीदों का भारत रफ्तार अपनी श्रद्धांजलि देता है कि हमारे देश के वीरों तुम्हारा कर्ज है हम पर और ये जिंदगी भर नहीं उतरने वाला। 


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