THU, 15 JANUARY 2026

Elections in 2026: महाराष्ट्र से बंगाल और तमिलनाडु तक...2026 में कहां-कहां होगा चुनावी शंखनाद

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राष्ट्रीय
01 Jan 2026, 03:53 pm
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रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Election in 2026: नए साल 2026 में भारत के कई बड़े राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। ये सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति के लिए ही अहम नहीं है बल्कि ये 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा भी तय कर सकते हैं। महाराष्ट्र, बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल में होने वाले चुनावों ने राजनीतिक माहौल को पहले ही गर्म कर दिया है। यहां हर राज्य में स्थिति अलग है लेकिन मुकाबला हर जगह दिलचस्प होने वाला है।


महाराष्ट्र: BMC चुनाव से बदलेगी राजनीति?


साल की शुरुआत महाराष्ट्र के बहुचर्चित बृहन्मुंबई नगर निगम यानी BMC चुनाव (BMC Election 2026) से होगी। ये सिर्फ एक नगर निकाय चुनाव नहीं, बल्कि शिवसेना की विरासत बनाम भाजपा की पकड़ जैसा एक बड़ा राजनीतिक संग्राम है।


उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच चली आ रही खींचतान ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया है। BMC चुनाव में ठाकरे गुट की पूरी कोशिश है कि वो बाल ठाकरे की परंपरागत जमीन पर फिर से अपनी पकड़ साबित करें। दूसरी तरफ, शिंदे अपने गुट को भाजपा के सहारे और मजबूती से खड़ा करना चाहते हैं।


इसी तरह, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी NCP भी चाचा बनाम भतीजा के झटके से गुजर चुकी है। शरद पवार और अजीत पवार के बीच हुआ खुला विवाद पूरे राज्य की राजनीति को प्रभावित कर चुका है। ताज़ा हालात ये बताते हैं कि भाजपा अपने दम पर इतना मज़बूत हो चुकी है कि उसे सरकार बनाए रखने के लिए दोनों पार्टियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। BMC पर कब्जा भाजपा के लिए सत्ता की मुहर जैसे होगा। जबकि MVA (उद्धव-कांग्रेस-शरद, महाविकास अघाड़ी) के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है।


बंगाल: ममता बनर्जी की सबसे कठिन परीक्षा


पश्चिम बंगाल का चुनाव 2026 (West Bengal election 2026) इस साल सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला मुकाबला होगा। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी पिछले दो विधानसभा जीत और लगातार भाजपा को चुनौती देकर राज्य की सबसे मज़बूत नेता साबित हुई हैं। लेकिन इस बार भाजपा पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है।


भाजपा लगातार ममता सरकार पर भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा और सीमा से घुसपैठ जैसे मुद्दों पर निशाना साध रही है। 2021 में सुवेंदु अधिकारी को साथ लाने के बाद भाजपा को लगा था कि वो राज्य की सत्ता के करीब हैं, लेकिन नतीजे उलटे पड़े।


फिर भी इस बार मुकाबला आसान नहीं होने वाला। ममता को राज्य के मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ने का फायदा मिलता है। कई विश्लेषकों का मानना है कि अगर TMC 2026 में दोबारा मजबूत स्थिति में आती है तो ममता बनर्जी 2029 की प्रधानमंत्री रेस में प्रमुख दावेदार बन सकती हैं।


असम: हिमंता बिस्वा सरमा का मजबूत मगर चुनौतियों से भरा मैदान


असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Hemanta Biswa Sarma) भाजपा के सबसे आक्रामक और प्रभावशाली क्षेत्रीय नेताओं में गिने जाते हैं। उनकी छवि एक ऐसे नेता की है जो प्रशासन और राजनीतिक संदेश, दोनों को बराबर संभालते हैं।


इस चुनाव में (Asam Election) CAA का मुद्दा, विदेशी नागरिकों पर विवाद, जनजातीय राजनीति और क्षेत्रीय पहचान सबसे बड़े चुनावी मुद्दे होंगे। भाजपा मजबूत स्थिति में तो दिख रही है, लेकिन जातीय समीकरण और छोटे क्षेत्रीय दलों के उभरने से मुकाबला कसा हुआ रहेगा। विपक्ष की चुनौतियां और ज्यादा रह सकती हैं। उन्हें ऐसा नारा और चेहरा खोजने की जरूरत है जो जनता को क्षेत्रीय मुद्दों के साथ जोड़ सके।


तमिलनाडु: द्रविड़ राजनीति के बीच BJP की मुश्किल


तमिलनाडु (Tamil Nadu Election) का राजनीतिक परिदृश्य हमेशा द्रविड़ पार्टियों के इर्द-गिर्द घूमता है। DMK और AIADMK पिछले कई दशकों से यहां का नेतृत्व कर रही हैं। भाजपा की तमिलनाडु में मौजूदगी अभी भी कमजोर है। पार्टी ने 1999 के बाद कभी यहां बड़ी जीत दर्ज नहीं की है।


2026 में भी स्थिति लगभग वैसी ही दिख रही है। DMK सरकार मजबूत है और AIADMK पुनर्गठन में लगी है। भाजपा कुछ सीटों की उम्मीद में तो है, लेकिन राज्य की द्रविड़ पहचान और राजनीतिक विचारधारा पार्टी की सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है। इसलिए, तमिलनाडु में भाजपा का चुनाव सीधा सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश ज्यादा है।


केरल: पारंपरिक LDF vs UDF की पुरानी लड़ाई


केरल में राजनीति हमेशा LDF (लेफ्ट) और UDF (कांग्रेस) के बीच घूमती रहती है। 2026 में भी मुकाबला इन्हीं दो गठबंधनों के बीच रहेगा। भाजपा की मौजूदगी बढ़ तो रही है, लेकिन वो अभी भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं दिखाई देती।


यहां के चुनावों में महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी और केंद्र-राज्य के संबंध प्रमुख मुद्दे होंगे। CPI(M) और कांग्रेस दोनों ही संगठित हैं, इसलिए चुनाव बेहद करीबी रह सकता है।


उपचुनाव में भी होगा दिलचस्प मुकाबला


गोवा, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, नागालैंड और त्रिपुरा में 2026 में उपचुनाव होंगे। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से किसी भी राज्य की सरकार पर इन नतीजों से बड़ा असर नहीं पड़ेगा। ये चुनाव सिर्फ छोटी-स्तरीय राजनीतिक हलचलें पैदा करेंगे।


2029 की राजनीति का रास्ता यहीं से होकर जाता है


अगर बड़े पैमाने पर देखें तो 2026 के सभी चुनाव 2029 की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम हैं। भाजपा के लिए चुनौती अपने किले को और मजबूत करना है, जबकि विपक्ष के सामने सबसे बड़ी समस्या एकजुटता की है। कांग्रेस और INDIA ब्लॉक को राज्य स्तर पर प्रभाव दिखाना होगा, तभी वे 2029 में मजबूत विकल्प बन पाएंगे।


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