जैसा सपना देखा था, उससे भी अधिक भव्य और सुंदर मंदिर का निर्माण हुआ है – सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण केवल एक स्थापत्य उपलब्धि नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था, समर्पण और वर्षों की प्रतीक्षा का प्रतीक बन चुका है। इसी भावना को व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि “जैसा सपना देखा था, उससे भी अधिक भव्य और अधिक सुंदर मंदिर का निर्माण हुआ है।”
डॉ. भागवत जी के इन शब्दों में वह भावनात्मक जुड़ाव झलकता है जो अयोध्या आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण तक की यात्रा में रहा। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और अध्यात्म का दिव्य स्वरूप है, जो पीढ़ियों के तप, संघर्ष और विश्वास का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि यह मंदिर राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक जागरूकता का प्रतीक बनेगा। मंदिर का हर स्तंभ, हर नक्काशी और हर कलाकृति भगवान श्रीराम की मर्यादा, आदर्श और त्याग की भावना को दर्शाती है।
आज जब मंदिर अपने पूर्ण वैभव के साथ सामने है, तो यह स्पष्ट रूप से दिखता है कि यह निर्माण कार्य साधारण नहीं था। आधुनिक तकनीक, प्राचीन भारतीय शिल्प, कारीगरों का कौशल और देशवासियों की आस्था—इन सबने मिलकर एक अद्भुत धरोहर खड़ी की है, जो आने वाली सदियों तक विश्व को भारतीय संस्कृति का गौरव बताएगी।
डॉ. भागवत जी ने यह भी कहा कि यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, संस्कार देने और देश को सकारात्मक दिशा देने का माध्यम बनेगा।
अयोध्या का यह भव्य राम मंदिर अब न सिर्फ भारत, बल्कि पूरे विश्व में भारतीय सभ्यता की पहचान बन चुका है। यह वह सपना है, जिसे देशवासियों ने वर्षों तक संजोया, और आज वह सपना वास्तविकता से भी अधिक सुंदर, प्रेरणादायी और गौरवपूर्ण रूप में हमारे सामने खड़ा है।
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