इंदौर दूषित पानी: निगम प्रशासन ने हाईकोर्ट में गिनाई सिर्फ 4 मौतें, इधर निगम के शीर्ष अफसरों पर गिरी गाज़

Indore Contaminated water: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई 14 लोगों की मौत के बाद शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने सरकार को इस मुद्दे पर जमकर लताड़ लगाई है। इतना ही नहीं कोर्ट में निगम की असंवेदनशीलता भी देखने को मिली। निगम की तरफ से कोर्ट में सिर्फ 4 मौतें ही दिखाई गई, जबकि इस मामले में अब तक 14 लोगों की मौतें हो चुकी हैं और 1400 से ज्यादा लोग बीमार हैं जो अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं कोर्ट ने सरकार से इस मामले पर पूरा ब्यौरा मांगा है।
तुरंत पानी के टैंकर्स का हो इंतजाम, वकीलों के साथ फोटो हों शेयर- हाईकोर्ट
कोर्ट ने नगर निगम और सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि इंदौर देश का सुंदर और साफ शहर है लेकिन गंदे पानी को पीने से हुई मौतों ने पूरे देश को शर्मशार किया है। ये एक बड़ी लापरवाही है, लोग मर रहे हैं। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि इंदौर की सुंदरता औऱ प्रतिष्ठा को बनाए रखा जाए। बता दें कि कोर्ट ने इस मामले में दायर दो याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई की है। सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिया है कि सभी प्रभावित लोगों को निशुल्क इलाज हो। साथ ही इलाके में जल्द से जल्द साफ पीने के पानी का इंतजाम किया जाए।
इतना ही नहीं याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में कहा कि हालात इतने खराब है कि लोगों को पानी के एक टैंकर पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इस पर कोर्ट ने कहा कि एक टैंकर से क्या होगा। तत्काल वहां पर और टैंकर भिजवाएं। इसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि कलेक्टर हो या SDM उन्हें बुलाइये और 10 मिनट के भीतर प्रभावित इलाके में और टैंकर भिजवाए जाएं जिसकी तस्वीर वकीलों के साथ शेयर की जाए। फिर निगम ने कहा कि इलाके में 10 टैंकर भेजे जा चुके हैं, अभी 4 और भेजेंगे।
नगर निगम ने पेश की स्टेटस रिपोर्ट
इधर कोर्ट के आदेशों के बाद शुक्रवार को 2 जनवरी को नगर निगम ने अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट में जमा की। इसके साथ ही एक तीसरी PIL भी दायर हुई, जिस पर सुनवाई में अदालत ने इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को नोटिस भेजा है। अब तीनों जनहित याचिकाओं की सुनवाई 6 जनवरी को एक साथ होगी।
अधिवक्ता मनीष यादव ने कोर्ट में कहा कि मृतकों के परिजनों को दिया जा रहा मुआवजा अपर्याप्त है, जिसे बढ़ाया जाना चाहिए। वहीं नगर निगम की स्टेटस रिपोर्ट में सिर्फ 4 मौतों का जिक्र किया गया है, जबकी हकीकत में ये आंकड़ा 14 पार गया है। इस तथ्य पर कोर्ट ने सरकार और निगम से तथ्यात्मक और विस्तृत रिपोर्ट पेश को कहा है। अदालत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए मामले पर करीबी निगरानी की बात कही है। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष रितेश इनानी ने कहा कि हमारी प्राथमिक मांग है कि इंदौर के हर नागरिक को शुद्ध पेयजल मिले और इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो। ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए दोषियों को सजा मिलनी जरूरी है।
एक्शन में मोहन सरकार, निगम अधिकारियों पर गिरी गाज़
इधर एमपी सरकार ने नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही को देखते हुए निगम के आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके अलावा अतिरिक्त आय़ुक्त का ट्रांसफर भी किया जा रहा है और जल वितरण विभाग के प्रभारी अधीक्षण इंजीनियर को उनके पद से हटा दिया गया है। खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर ये जानकारी शेयर की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 16 निगमों के महापौर , अध्यक्ष, कमिश्नर, स्वास्थ्य विभाग, नगरीय विकास विभाग समेत संबंधित विभागों के प्रमुखों की बैठक ली जा रही है। इन्हें जरूरी दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
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