भारतीय कानून के ऐसे 5 नियम, जिनका हर महिला को जानना बहुत जरुरी है.

Important Laws and Rights for Women in India: महिलाओं की सुरक्षा और समृद्धि के लिए कानून में अनेकों प्रावधान हैं, जिनके बारे में उन्हें पता होना बहुत जरुरी है। अक्सर महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में पता नहीं होता। आज के समय में महिलाओं को अपने अधिकारों का ज्ञात होना जरुरी है। हमारे भारतीय कानून और समाज में महिलाओं को अनेक अधिकार दिए हुए हैं, लेकिन उनका सही इस्तेमाल तभी किया जा सकता है जब उनकी पूरी जानकारी हो।
महिलाओं के लिए उपयोगी 5 बड़े कानून
1.सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है :- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 [BNSS] के अनुसार, सामान्यतः सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। यह अधिकार धारा 43(5) के तहत सुरक्षित है। अगर महिला को गिरफ्तार करना ज्यादा ही जरुरी है, तो अपवाद स्वरूप, महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति और मजिस्ट्रेट की लिखित अनुमति से ही गिरफ्तारी संभव है।
2.किसी भी महिला को महिला पुलिसकर्मी ही गिरफ्तार कर सकती है :- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के अनुसार, किसी भी महिला की गिरफ्तारी के लिए महिला पुलिसकर्मी का होना जरुरी है। कुछ अन्य और असाधारण परिस्थितियों में, मजिस्ट्रेट की पूर्व लिखित अनुमति से ही महिला पुलिसकर्मी द्वारा रात में गिरफ्तारी संभव है।
3.महिलाओं को समान काम के लिए पुरुषों के बराबर वेतन पाने का अधिकार है :- भारत के कानून में समान काम के लिए महिलाओं को पुरुषों के बराबर वेतन पाने का कानूनी और संवैधानिक अधिकार है। कार्यक्षेत्र पर महिलाओं और पुरुषों में किसी भी तरह का भेदभाव ना हो, इसके लिए कानून हैं। समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 और भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39(d) समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित करते हैं कि नियोक्ता भर्ती, पदोन्नति, प्रशिक्षण और वेतन में जेंडर के आधार पर भेदभाव न करें। यह अधिकार सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता के लिए आवश्यक है।
4.कोई भी महिला किसी भी पुलिस स्टेशन में FIR (एफआईआर) दर्ज करा सकती है, भले ही अपराध उसके अधिकार क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) में न हुआ हो :- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173 के तहत कोई भी महिला किसी भी पुलिस थाने में जाकर अपनी FIR दर्ज करवा सकती है, भले ही मामला उस थाने के क्षेत्राधिकार में हुआ हो या नहीं हुआ हो। इसे zero (0) FIR कहते हैं। पुलिस ये नहीं कह सकती कि मामला उनके थाने के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) का नहीं है। ये नियम पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी है।
5.बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार प्राप्त हैं:- हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के तहत, बेटियों को अपने पिता की पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर ही जन्मसिद्ध अधिकार होता है, चाहे बेटी का विवाह हो गया हो या नहीं हुआ हो। 2005 के बाद, बेटियां भी बेटों की तरह 'सहदायिक' (Coparcener) मानी जाती हैं, जिसका अर्थ है कि उनका जन्म से ही संपत्ति पर अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा (2020) मामले में स्पष्ट किया है कि हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून 2005 के तहत, बेटी को जन्म से ही पिता की पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार मिलता है। कोर्ट ने कहा कि पिता का इस नियम के लागू होने के वक़्त यानि 9 सितंबर 2005 को जीवित होना अनिवार्य नहीं है। यदि पिता की मृत्यु उससे पहले भी हुई हो, तो भी बेटी समान हिस्सेदार है।
कंटेंट एंड रिसर्च- एडवोकेट प्रत्युष तिवाड़ी, कानूनी विशेषज्ञ
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