भारत EU ने फ्री ट्रेड अग्रीमेंट किया साइन: लक्ज़री कारों पर टैक्स 110% से 10% हुआ, दवाइयों से लेकर इम्पोर्टेड शराब तक, जानिए किन चीज़ों पर टैक्स और टैरिफ कम हुआ

India EU FTA deal: भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 18 साल की लम्बी बातचीत और नेगोशियेशन के बाद फ्री ट्रेड अग्रीमेंट (FTA) की डील पर साइन कर लिए हैं। दोनों पक्षों के बीच इस ट्रेड अग्रीमेंट को EU की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा (Antonio Costa) ने मंगलवार को दिल्ली में 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान इसकी घोषणा की। इस डील में दोनों पक्ष टैक्स और टैरिफ में भारी छूट देने के लिए राज़ी हो गए हैं।
इस व्यापार समझौते के लिए दोनों तरफ से लगभग दो दशकों से बातचीत और कोशिश की जा रही थी। इसकी शुरुआत 2007 में हुई थी, बीच में 2013 में बातचीत रुकी, लेकिन 2021 में इसने फिर तेज़ी पकड़ी और अब 2026 में ज़्यादातर शर्तों पर सहमति बन गई है। समझौते के तहत दोनों पक्षों ने टैरिफ में भारी कटौती की है, जिससे सालाना करीब 4 अरब यूरो (लगभग 43,500 करोड़ रुपये) की बचत होगी। यह दुनिया के करीब 200 करोड़ लोगों और वैश्विक जीडीपी के 25% हिस्से को जोड़ने वाला बड़ा इकॉनोमिक ब्लॉक बनेगा। इस डील से EU के 90% से ज्यादा प्रोडक्ट्स पर लगने वाले टैक्स और चार्जेज बहुत कम हो जायेंगे या पूरी तरह से हट जायेंगे। (reduced Tariffs and Import Duty)
सूत्रों के मुताबिक, इस ट्रेड डील के वर्ष 2027 से प्रभावी होने की सम्भावना बताई जा रही है।
भारतीय उपभोक्ताओं के लिए प्रमुख फायदे:
- बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज जैसी लक्ज़री गाड़ियों पर इम्पोर्ट शुल्क 110% से घटकर 10% हो जाएगा। इससे सालाना 2.5 लाख वाहनों का अनुमान लगाया जा रहा है।
- प्रीमियम शराब और इम्पोर्टेड वाइन पर टैरिफ 150% से घटकर 20-30% तक आएगा, बीयर पर 110% से 50% और स्पिरिट एल्कोहोल पर 40% तक घट जायेगा।
- जैतून तेल, मार्जरीन, फ्रूट जूस और प्रोसेस्ड फूड पर शुल्क खत्म या काफी कम।
- दवाओं, मेडिकल उपकरणों, मशीनरी (44% तक), केमिकल्स (22% तक) और एयरक्राफ्ट/स्पेस उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी राहत।
- भारतीय निर्यात जैसे कपड़ा, जूते, चमड़ा, आभूषण और हेंडीक्राफ्ट्स पर EU में 10% तक ड्यूटी कम या शून्य होगी।
फ़िलहाल, कृषि और डेयरी सेक्टर को इस डील से बाहर रखा गया है, ताकि किसानों को उनके सामान बेचने पर सुरक्षा मिली रहे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि फार्मा और IT सेक्टर में बिज़नेस 20-30% तक बढ़ सकता है। इसके अलावा, कई सेवाओं में भारतीय पेशेवरों और लोगों को वीजा और काम करने में आसानी होगी। EU भारत को ग्रीन एनर्जी के लिए अगले दो साल में 50 करोड़ यूरो की मदद भी करेगा।
पीएम मोदी ने इसे 'साझा समृद्धि का रोडमैप' बताया, जबकि उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि "हमने इतिहास रचा है। यह समझौता दोनों पक्षों के बीच सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और लाखों नौकरियां पैदा करेगा।" ये समझौता 2027 से लागू होने की उम्मीद है, जिसमें टैरिफ कटौती चरणबद्ध तरीके से 5 से 10 साल में पूरी होगी।
यह डील न केवल व्यापार बढ़ाएगी, बल्कि रक्षा, निवेश सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को भी नई ऊंचाई देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत और EU के बीच व्यापार दोगुना हो सकता है, जो वर्तमान में 12.5 लाख करोड़ रुपये के आसपास है।
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