इंदौर दूषित पानी: लैब रिपोर्ट में खुलासा- जहरीले बैक्टीरिया वाले पानी ने ही निगलीं 14 जिंदगियां, आज MP हाईकोर्ट में सुनवाई

Indore Contaminated drinking Water: स्वच्छता में नंबर वन देश का सबसे साफ शहर इंदौर में नालियों से निकला जहर लोगों के गिलास तक पहुंच गया। उस जहर ने 14 जिंदगियां निगल लीं। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी को पीने से अब तक करीब 14 लोगों की मौत हो गई है और अस्पतालों में 1400 से ज्यादा लोग बीमार पड़े हैं। अब तो हर दिन अस्पताल में नए-नए मरीजों की कतारें भी लग रही हैं। आज इस मुद्दे को लेकर आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई भी होगी, जिसमें कोर्ट सरकार और प्रशासन से जवाब मांगेगा। दूसरी तरफ इन मौतों के बाद अब पानी की लैब रिपोर्ट भी सामने आ गई है। जिसने ये साफ कर दिया है कि लोगों की मौत इसी दूषित पानी को पीने से हुई है।
शौचालय का पानी भी लीकेज में मिला
इंदौर के CMHO डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने मीडिया को बताया कि बताते हैं कि मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट में पानी के जहरीले होने की पुष्टि हुई है। भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास पानी की पाइपलाइन फूटी हुई मिली। इसके ठीक बगल में एक शौचालय बना हुआ है। जिससे वहां की गंदगी सीधे घरों के नल के पानी में घुल गई। ये लीकेज सिस्टम की कुंभरकरणी नींद भी ज्यादा लंबे समय से था। इसका सबूत देते हुए स्थानीय़ लोगों ने कहा कि उन्होंने कई बार स्थानीय बीजेपी पार्षद से शिकायत की। लेकिन ना तो कोई सुनवाई हुई और ना ही कोई कार्रवाई। सिर्फ प्रशासन अपनी कुंभकरणी नींद में सोता रहा और मासूम लोग मरते रहे।
अव्यान के पिता ने सिस्टम पर उठाया सवाल
दूसरी तरफ 5 महीने के अव्यान, जिसकी मौत इसी दूषित पानी की वजह से हुई उसके घर मातम पसरा हुआ है। अव्यान के पिता सुनील साहू बताते हैं कि अव्यान की मां बच्चे को दूध नहीं पिला पाती थीं। तो डॉक्टर की सलाह पर अव्यान को पैकेट वाला दूध दिया जाता था जिसमें नल का पानी मिलाया जाता था। लेकिन अव्यान को पांच दिन पहले बुखार और दस्त हुए। मां-बाप ने दवाइयां दीं लेकिन उसकी हालत और बिगड़ती चली गई और आखिर में सोमवार अस्पताल ले जाते वक्त उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
सिस्टम पर सवाल उठाते हुए अव्यान के पिता सुनील साहू कहते हैं कि हमें कभी बताया नहीं गया कि पानी जहरीला है इसे ना पीएं। हमें ऐसा पता होता तो बच्चे को हम पानी ना पिलाते। अगर हमें ये बताया जाता तो आज हमारा बच्चा जिंदा होता। पिता ने कहा कि 10 साल बाद भगवान ने हमें खुशी दी थी लेकिन इस नाकारा सिस्टम ने वो भी छीन ली। वहीं अव्यान की मां सदमे में है। अपने बच्चे को याद करके वो बार-बार बेहोश हो जाती हैं।
प्रशासन की इस लापरवाही पर अब आज मध्यप्रदेश हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा। कुछ अधिकारी भी सस्पेंड हुए हैं। लेकिन सवाल वही है क्या सस्पेंशन से अव्यान समेत उन मासूमों की जिंदगियां वापस आ जाएंगी जिन्होंने सिस्टम के आगे खुद को कुर्बान कर दिया।
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