चोरी 10 रुपए की हो 10 करोड़ रुपए की... क्या सजा देगा कानून?

चोरी 10 रुपए की हो 10 करोड़ रुपए की... क्या सजा देगा कानून?
राष्ट्रीय
13 Apr 2026, 05:16 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

क्या आपके कभी 10 रुपए चोरी हुए हैं, और क्या ये पैसे चोरी होने पर आपने कोई केस दर्ज कराया है। जाहिर है कि नहीं कराया होगा। क्योंकि आपके लिए 10 रुपए की कोई कीमत नहीं लेकिन अगर कहीं 10 करोड़ रुपए चोरी हो जाएं तो आपकी सांसें ऊपर-नीचे होने लगेंगी और तुरंत आप पास के थाने में केस दर्ज करने लगेंगे लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि चोरी तो चोरी है। चाहे वो 10 रुपए की हो या फिर 10 करोड़ रुपए की। कानून भी चोरी के लिए बना हुआ है। तो यहां हम आपको बता रहे हैं कि दोनों ही मामले में कानून में क्या प्रावधान है।

चोरी पर क्या कहता है कानून?

भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की Section 303 चोरी के अपराध से संबंधित है। पहले चोरी IPC की धारा 378 के अंतर्गत आती थी, लेकिन BNS ज्यादा स्पष्टता और सख्त दिशानिर्देश देती है। यह प्रावधान मूल तत्वों को बनाए रखते हुए दक्षता और न्याय को बढ़ावा देने के लिए सुधार की बात करता है।

Section 303 BNS- जो कोई भी किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसके कब्जे से कोई चल संपत्ति, बेईमानी से लेने के इरादे से, उस संपत्ति को इस प्रकार लेने के लिए ले जाता है, तो वह चोरी करता है।

BNS (भारतीय न्याय संहिता) में चोरी से संबंधित प्रमुख प्रावधान

मूल चोरी (धारा 303): किसी की सहमति के बिना उसकी संपत्ति बेईमानी से हटाना चोरी है।

सजा: 3 साल तक का कारावास, या जुर्माना, या दोनों।

दोबारा अपराध: अगर कोई शख्स दोबारा चोरी करता है, तो उसे कम से कम 1 साल से लेकर 5 साल तक का सश्रम कारावास और जुर्माना हो सकता है।

समुदाय सेवा का प्रावधान (Community Service): अगर चोरी की गई संपत्ति का मूल्य ₹5,000 से कम है और ये व्यक्ति का पहला अपराध है, तो संपत्ति वापस करने पर सजा के बजाय समुदाय सेवा (Community Service) दी जा सकती है।

छीना-झपटी (Snatching - धारा 304(2)): अगर चोरी बलपूर्वक, झपटकर या अचानक की जाती है, तो इसे झपटमारी कहा जाता है, जिसमें 3 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।

गंभीर चोरी (धारा 305): किसी घर, टेंट, या जहाज (जहां लोग रहते हैं) से चोरी करने पर 7 साल तक की सजा हो सकती है।

नौकर/कर्मचारी की चोरी (धारा 306): अगर मालिक के घर या ऑफिस से कोई कर्मचारी चोरी करता है, तो उसे 7 साल तक की सजा हो सकती है।

बराबर नहीं है 10 रुपए और 10 करोड़ की चोरी

कानून की नज़र में 10 रुपये की चोरी और 10 करोड़ रुपये की चोरी एकदम समान नहीं मानी जाती—दोनों “चोरी” (theft) हैं, लेकिन सजा तय करते समय रकम का बड़ा फर्क पड़ता है।

भारत में चोरी से जुड़ा कानून भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 378 और 379 के तहत आता है।

सजा कैसे तय होती है?

अधिकतम सजा: 3 साल की जेल, या जुर्माना, या दोनों

वैसे असली सजा कोर्ट तय करती है, और इसमें ये बातें देखी जाती हैं कि चोरी की रकम कितनी है। जैसे 10 रुपये की चोरी बहुत छोटी मानी जाती है। इसमें कोई सजा का भी प्रावधान नहीं है। वहीं 10 करोड़ की चोरी गंभीर अपराध में आती है। इसमें अपराध की गंभीरता भी देखी जाती है कि क्या ये पहली बार किया गया है या फिर प्लान बनाकर।

कंटेंट और रिसर्च- एडवोकेट प्रत्युष तिवाड़ी, कानूनी विशेषज्ञ


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