हज़ार साल बाद भी अटल! सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में PM मोदी का गौरवपूर्ण संदेश, हमलावर भूल गए, सोमनाथ नहीं

Somnath Swabhiman Parv: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने आज रविवार को गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' में भाग लिया। मंदिर से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो हमलावर हज़ार साल पहले मंदिर को तोड़कर ये सोच रहे थे कि वे जीत गए हैं, मंदिर की फहराती हुई ध्वजा कह रही है कि हमारी शक्ति क्या है।
इस विशेष पर्व का आयोजन महमूद गजनवी द्वारा 1026 में मंदिर पर किए गए हमले के 1000 वर्ष पूरे होने पर आयोजित किया गया है। साथ ही, 1951 में सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से मंदिर के पुनर्निर्माण और राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक है।
पर्व 8 जनवरी से शुरू हुआ था, जो आज 11 जनवरी को संपन्न हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह लगभग 9:45 बजे 'शौर्य यात्रा' का नेतृत्व किया, जिसमें 108 घोड़ों की प्रतीकात्मक शोभायात्रा निकाली। यह यात्रा उन अनगिनत वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि थी, जिन्होंने सदियों तक मंदिर की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर किए। यात्रा के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे रास्ते फूल बरसाते रहे।
इसके बाद प्रधानमंत्री ने मंदिर में दर्शन-पूजन किया, सामूहिक ओंकार मंत्र जाप में भाग लिया और सरदार पटेल तथा वीर हमीरजी गोहिल की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की। कल शाम मोदी ने ड्रोन शो भी देखा, जिसमें लगभग 3000 ड्रोनों से शिव तांडव, त्रिशूल, ओम चिन्ह और मंदिर के ऐतिहासिक दृश्य प्रदर्शित किए गए।
शौर्य सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गजनी से औरंगजेब तक इतिहास के चंद पन्नों में सिमट गए, लेकिन सोमनाथ आज भी खड़ा है। हजार साल पहले जो आक्रमण हुए थे इसे नष्ट करने के लिए, वे कभी सफल नहीं हुए। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में गर्व है, गरिमा है और गौरव है। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक सहनशक्ति और अटूट संकल्प का प्रतीक बताया।
यह आयोजन सोमनाथ को न केवल धार्मिक केंद्र के रूप में, बल्कि भारत की सनातन शक्ति और पुनर्निर्माण की भावना के रूप में स्थापित करता है। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस महापर्व को ऐतिहासिक बना दिया। प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट की बैठक की भी अध्यक्षता की और विकास कार्यों पर चर्चा की।
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