सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की 8th क्लास की किताब पर लगाया बैन, 'Corruption In Judiciary' चैप्टर से शुरू हुआ विवाद गरमाया

सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की 8th क्लास की किताब पर लगाया बैन, 'Corruption In Judiciary' चैप्टर से शुरू हुआ विवाद गरमाया
राष्ट्रीय
26 Feb 2026, 03:11 pm
रिपोर्टर : Dushyant

Supreme Court Ncert Book Ban: हाल ही में NCERT द्वारा जारी की गयी कक्षा 8 की सोशल स्टडीज़ की किताब में शामिल 'Corruption In Judiciary' वाले विवादित चैप्टर पर कड़ी कार्रवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस किताब पर पूरी तरह बैन लगा दिया है। चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह पूरे न्यायपालिका के तंत्र पर "पहली गोली चलाने" जैसा है और इससे न्याय व्यवस्था की छवि ख़राब होगी। कोर्ट ने NCERT को मार्केट में पहुंची किताब की सभी कॉपीज़ वापस लेने और इन्टरनेट पर फैली किताब की डिजिटल पीडीएफ्स को भी हटाने का आदेश दिया है। साथ ही, बुक को ऑनलाइन शेयर करने पर भी रोक लगा दी है।

यह विवाद हाल ही NCERT की 8th क्लास की छपी नई किताब 'Exploring Society: India and Beyond Part 2' से शुरू हुआ, जिसमें देश के Judiciary System के बारे में बताता एक चैप्टर 'हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका' था। इस चैप्टर में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, लाखों लंबित मामले, जजों की कमी और न्याय में देरी जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया था। किताब में सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाई कोर्ट में 62 लाख से अधिक और जिला अदालतों में 4.7 करोड़ से ज्यादा पेंडिंग चल रहे मामलों के आंकड़े दिए गए थे। साथ ही, ये भी लिखा था कि कैसे न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से गरीबों को न्याय मिलने में कठिनाई होती है और न्याय मिलने में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिशों का भी ज़िक्र था।

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, "यह न्यायपालिका को बदनाम करने की साजिश है। बच्चों को गलत संदेश देकर संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" उन्होंने इसे "गहरी साजिश" और "योजना पूर्वक हमला" बताया। केस की सुनवाई वाली पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एम. विपुल पंचोली भी शामिल थे। कहा कि यह कोशिश भारत की न्यायपालिका पर पहली गोली चलाने जैसा है और न्याय तंत्र का खून बह रहा है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार और NCERT की ओर से माफी पेश की तथा कहा कि जिम्मेदार व्यक्तियों को भविष्य में किसी भी किसी भी मंत्रालय से जुड़े कामों से दूर रखा जाएगा। एनसीईआरटी ने किताब की पीडीएफ अपनी वेबसाइट से भी हटा दी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह काफी नहीं है। जो पीडीएफ डाउनलोड की जा चुकी है, उन्हें भी हटवाया जाना ज़रूरी है और गहन जांच का आदेश दिया। साथ ही, शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा सचिव और NCERT के डायरेक्टर को अवमानना नोटिस भी जारी किया जा चुका है।

कोर्ट ने साफ़ कहा कि ऐसी कोई भी कोशिश, जो न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाए, बर्दाश्त नहीं की जाएगी। CJI की फटकार लगने के बाद NCERT ने अधिकारिक तौर पर माफ़ी भी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी। यह घटना एजुकेशन सिस्टम में सेंसिटिव मुद्दों को शामिल करने के तरीके पर नई बहस छेड़ रही है।


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