5 साल की बच्ची के साथ रेप और Private Part को चाकू से काटने वाले की सुप्रीम कोर्ट ने रोकी फांसी

Supreme Court Put Stay on Death Penalty of Rapist: वक़्त के साथ-साथ ऐसा लग रहा है जैसे भारत में न्याय प्रणाली सिर्फ एक मज़ाक बन कर रह गई है। हाल ही में ऐसी ही एक खबर सामने आई है, जिसने जूडिशरी और सुप्रीम कोर्ट पर से भरोसा जनता का भरोसा उठा दिया है। 10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे बलात्कारी की फांसी पर रोक लगा दी, जिसने ना सिर्फ एक 5 साल की बच्ची का बलात्कार किया, बल्कि उसके गुप्तांग को चाकू से काटकर बड़ा करने की कोशिश की, ताकि रेप करने में आसानी हो, और इसके बाद बच्ची के शव को छिपा भी दिया। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी का Psychological Evaluation करवाने और बीते वक़्त में जेल में उसके व्यवहार की रिपोर्ट जेल प्रशासन से मांगी है। (Vagina Slit with Knife for better Penetration)
जानकारी के अनुसार, 24 सितम्बर 2024 को पीडिता की माँ ने भोपाल के शाहजहानाबाद अपनी 5 साल की बच्ची के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। दो दिन के गहन तलाशी के बाद 26 सितम्बर को बच्ची का पता लगा लिया। दरअसल, आरोपी अतुल निहाले (Atul Nihale) के घर से बहुत तेज़ बदबू आ रही थी। शिकायत पर जब पुलिस ने घर की तलाश लेने की कोशिश की, तो आरोपी की माँ और बहन ने उन्हें रोकने की कोशिश की। पुलिस जबरन अंदर घुसी और बाथरूम में पानी की टंकी में बच्ची की लाश मिली।
फॉरेंसिक रिपोर्ट में बच्ची के साथ बलात्कार की पुष्टि हुई। आगे की जाँच में सामने आया कि आरोपी ने ना सिर्फ बलात्कार किया, बल्कि चाकू की मदद से बच्ची की योनि को काटकर फ़ैलाने की कोशिश की, ताकि उसके साथ सम्बन्ध बनाने में आसानी हो। बच्ची के शरीर से खून निकलने पर उसे कपडे से साफ़ किया और बलात्कार जारी रखा।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और मामले को POCSO Act के तहत फ़ास्ट ट्रैक पर लेकर सुनवाई शुरू की। अग्रिम जाँच में सामने आया कि अतुल निहाले एक आदतन अपराधी था और उसके खिलाफ पहले भी 5 अपराधिक मामले दर्ज थे। 6 महीनों तक केस का ट्रायल चलने के बाद भोपाल की स्पेशल पोक्सो कोर्ट ने अतुल को अपराधी माना और बच्ची के साथ हुई गंभीर बर्बरता के चलते केस को “Rarest of the Rare” केटेगरी में रखा। कोर्ट ने अतुल को रेप, मर्डर और Aggravated Assault के चार्ज लगाकर तीनों मामलों में फांसी की सज़ा सुनाई और अतुल की माँ और बहन को आरोप में साथ देने के लिए 2-2 साल की कैद दी।
बाद में अतुल ने मध्य प्रदेश के हाई कोर्ट में अपील दायर की, लेकिन 22 जनवरी’26 को MP हाई कोर्ट ने भी मौत की सज़ा को बरक़रार रखा। साथ ही, हाई कोर्ट ने अपनी जाँच में ये भी पाया कि आरोपी को कोई भी मानसिक बीमारी नहीं है, जिसके चलते उसने ये अपराध किया हो, ना ही उसे अपने कृत्य पर किसी तरह का पछतावा है। इसलिए कोर्ट ने भी फांसी की सज़ा को जस का तस रखा।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मिलने वाले न्याय से पलटी मार ली। अतुल ने सुप्रीम कोर्ट में भी अपील दायर की, जिस पर एक्शन लेते हुए जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजरिया के बेंच ने 10 मार्च को फांसी को सज़ा पर स्टे लगा दिया और आरोपी के Psychological Evaluation की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। साथ ही, कोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड, परिवीक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट, अपराधी द्वारा किए गए कार्य से संबंधित रिपोर्ट और जेल के अंदर उसके व्यवहार पर भी एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
बीते कुछ वक़्त में अलग-अलग कोर्ट से बलात्कारियों और अपराधियों की सज़ा कम करने या सज़ा रोकने की जैसी ख़बरें सामने आईं हैं, उनको देखकर तो यही लगता है कि देश का न्याय तंत्र कमज़ोर होता जा रहा है और ये अब अपराधियों को बचाने की कोशिश कर रहा है।
याद रखिए – “Justice Delayed Is Justice Denied.” न्याय देने में देरी करना न्याय नहीं करने के बराबर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की रिपोर्ट पढने के लिए यहाँ क्लिक करें
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