जिसका डर था वही हुआ, वोटिंग के दौरान प. बंगाल में जबरदस्त हिंसा, बम तक फेंके गए, क्या इस बार होगा 'खेला'?

पश्चिम बंगाल में चुनाव हो और वहां से हिंसा की कोई खबर ना आए, पता नहीं ऐसा मौका आएगा। क्योंकि 23 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग के दौरान बंगाल के कई जिलों से हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। मुर्शिदाबाद जिले के नौदा में अराजक तत्वों ने देसी बम तक फेंक दिए। जिससे कई लोग घायल हो गए। हिंसा की इन घटनाओं को लेकर TMC का जो बयान आया वो भी गले नहीं उतर रहा। TMC नेता रिजू दत्ता ने कहा कि छोटी-मोटी घटनाओं को छोड़कर कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई है। मतदान शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है।
मुर्शिदाबाद, मालदा के कई पोलिंग बूथ पर मतदान शुरू होने के बाद EVM में खराबी होने की खबरें भी सामने आई। फिर बीच में ही वोटिंग रोकनी पड़ी। लगभग दो घंटे बाद फिर से मतदान शुरू हुआ। दूसरी तरफ मतदान शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर पोस्ट किया और कहा कि आज पहले चरण की वोटिंग पश्चिम बंगाल में हैं, सभी लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करें और नए वोटर्स भी इस बार वोट डालने जरूर जाएं।
इस बार कौन मारेगा बाज़ी?
पश्चिम बंगाल में इस बार किसकी सरकार बनेगी इसे समझने के लिए यहां का सियासी ताना-बाना समझते हैं। पश्चिम बंगाल के विधानसभा में 294 सीटें हैं। जिनमें से आज 152 सीटों के लिए पहले चरण का चुनाव हो रहा है। वहीं कुल 294 सीटों में से 84 सीटें रिजर्व हैं। इनमें से भी 68 अनुसूचित जाति के लिए और 16 अनुसूचित जनजाति के लिए हैं।
2021 के विधानसभा चुनाव में इन 84 रिजर्व सीटों में TMC ने 45 सीटें जीती थीं। बीजेपी को 39 सीटें मिली थीं। वहीं TMC ने कुल 213 सीटें जीती थीं। वहीं बीजेपी को 77 सीटों मिली थीं। सीटों के हिसाब से देखा जाए तो इस चुनाव में बीजेपी को हार मिली थी लेकिन बीजेपी हारते हुए भी नहीं हारी थी। क्योंकि 2021 से पहले 2016 में बीजेपी को महज तीन सीटें मिली थीं। ऐसे में सिर्फ 5 साल में 3 सीटों से 77 सीटों पर शानदार जीत को बीजेपी के लिए बंगाल में संजीवनी माना गया था।
बीजेपी की क्या रही रणनीति?
अब 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी पश्चिम बंगाल में जबरदस्त रणनीति अपनाई। जिसमें सबसे अहम तौर पर संगठन का पुनर्गठन और बूथ स्तरीय मजबूती को टारगेट किया गया है। वहीं समिक भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल बीजेपी का अध्यक्ष बनाया फिर इसी साल फरवरी में पार्टी ने 1000 से ज्यादा मंडल के अध्यक्षों की नियुक्ति की। 170 से ज्यादा टारगेट सीटों पर बूथ समितियों का गठन किया।
बीजेपी ने सिर्फ संगठनात्मक स्तर पर नहीं नहीं बल्कि अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ, ओबीसी आरक्षण दुरुपयोग, SSC घोटाला, महिला सुरक्षा, बंगाली संस्कृति की रक्षा, रोजगार और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास का मुद्दा भी जोरों शोरों से उठाया था। चुनाव से पहले ही करीब 1000 CAA कैंप लगाकर हिंदू रिफ्यूजी वोटर को जोड़ा।
वहीं बीते कई सालों में भाजपा नेताओं की हत्या, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने बंगाल की तस्वीर काफी धुंधली कर दी है। ऐसे में अब यह देखना काफी दिलचस्प रहेगा की ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस बीजेपी के इस रणनीति का जवाब किस तरह देती है।
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