बंगाल में बीजेपी की आंधी में उड़ी ममता बनर्जी, भगवा पार्टी को दो तिहाई से अधिक सीटें, जानें जीत के 5 बड़े कारण

West Bengal Election Result 2026: बंगाल समेत 4 राज्यों और पुडचेरी विधानसभा चुनाव के नतीजे अब धीरे-धीरे साफ होने लगे हैं। बंगाल में बीजेपी ने इतिहास रच दिया है। बीजेपी 198 सीटों पर आगे चल रही है जबकि सत्तारूढ़ टीएमसी सिर्फ 88 सीटों पर आगे चल रही है। चुनाव आयोग के अनुसार बीजेपी को 45 प्रतिशत वोट मिले हैं। जबकि टीएमसी को 42 प्रतिशत वोट मिले। इस बीच निवर्तमान सीएम और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी का बयान सामने आया है। ममता ने कहा कि चुनाव आयोग मनमर्जी कर रहा है। अंतिम राउंड के बाद जीत हमारी ही होगी। ममता बनर्जी फिलहाल भवानीपुर सीट से आगे चल रही है। जबकि उनके प्रतिद्वंदी और बीजेपी उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी फिलहाल पीछे चल रहे हैं। दोनों के बीच कांटे की टक्कर है। ऐसे में आइये जानते हैं बीजेपी की जीत के 5 बड़े कारण क्या रहे?
1. अमित शाह की रणनीति और कैपिंग
बंगाल चुनाव को इस बार बीजेपी ने प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं 15 दिनों तक कोलकाता में कैंपिंग की थी। उन्होंने वोटिंग से लेकर हर एक सीट पर डेटा जुटाया। पिछले चुनाव में जो सीटें 5 हजार से कम अंतर से हारी थी उनको इस बार टारगेट किया गया। बूथ स्तर के सभी कार्यकर्ताओं को एक्टिव किया गया। जिसका परिणाम है कि आज बीजेपी पहली बार सरकार बनाती नजर आ रही है। इसके अलावा उन्होंने करीब 100 से अधिक रैलियां और कई रोड शो किए।
2. बीजेपी का आक्रामक चुनाव अभियान
बंगाल चुनाव को लेकर बीजेपी ने आक्रामक चुनाव अभियान की रणनीति बनाई। बीजेपी ने करीब सभी सीटों पर सांसदों और विधायकों को रणनीति बनाने के लिए तैनात किया। हर सीट पर एक विधायक और एक सांसद को जिम्मेदारी दी गई थी। इसके अलावा कई राज्यों के सीएम ने भी प्रचार किया। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण थे यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ। सीएम योगी ने करीब 50 से अधिक रैलियां की। वे अपने भाषणों में सीएम ममता और अपने शासन की तुलना करते थे। जिसका असर भी लोगों पर हुआ। इसके साथ ही उनकी हिंदुत्ववादी छवि भी बीजेपी के लिए मददगार रही।
3. एसआईआर और घुसपैठियों को बाहर करना
बीजेपी की जीत में बड़ा योगदान एसआईआर का भी रहा। एसआईआर प्रकिया के जरिए बंगाल में करीब 91 लाख वोटर्स के नाम कटे। इससे पहले केंद्र ने बंगाल से आए घुसपैठियों की पहले पहचान की, फिर डिटेक्ट किया और उन्हें बंगाल से बाहर निकाला। माना जा रहा है कि इसका सबसे अधिक प्रभाव टीएमसी पर पड़ा। जिन वोटर्स के नाम कटे उनमें से करीब 90 प्रतिशत वोटर्स टीएमसी के थे। ऐसे में टीएमसी को बड़ा नुकसान हुआ।
4. मुस्लिम और हिंदू वोटर्स का ध्रुवीकरण
बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत में हुमायूं कबीर और ओवैसी का भी बड़ा रोल रहा। दोनों ने टीएमसी को हराने के लिए गठबंधन किया था। हुमायूं कबीर ने आम जनता उन्नयन पार्टी बनाई और सभी सीटों पर चुनाव लड़ा। वे टीएमसी के बड़े नेता थे। ऐसे में मुस्लिम वोट बंट गए। जिसका नुकसान टीएमसी को हुआ। इसके अलावा ओवैसी ने भी करीब 10 सीटों पर चुनाव लड़ा। जिसका नुकसान भी ममता को हुआ।
5. हिंदु वोटों का ध्रुवीकरण और टीएमसी की छवि
बीजेपी इस बार बंगाल में हिंदुओं को यह समझाने में कामयाब रही कि अगर आप एक साथ वोट करेंगे तो ममता की हार तय है। बीजेपी ने घुसपैठियों को बड़ा मुद्दा बनाया। 2021 में बीजेपी की हार के बाद जो हिंसा हुई इससे भी हिंदुओं में भारी रोष था। इसके अलावा त्योहारों पर हिंदुओं को निशाना बनाना, टीएमसी के गुंडों द्वारा विशेषकर हिंदुओं को धमकाना भी ममता क खिलाफ गया। करीब 15 साल से ममता सीएम थी ऐसे में उनके खिलाफ सत्ता विरोधी लहर भी थी।
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