मोदी सरकार लिए फायदा या नुकसान? महिला आरक्षण और परिसीमन बिल गिरने का क्या पड़ेगा इम्पैक्ट

मोदी सरकार लिए फायदा या नुकसान? महिला आरक्षण और परिसीमन बिल गिरने का क्या पड़ेगा इम्पैक्ट
राष्ट्रीय
18 Apr 2026, 10:29 am
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Women Reservation Bill Failed: महिला आरक्षण बिल संसद में फेल होने के बाद अब देश भर से मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में ये पहली बार था कि कोई विधेयक संसद में गिरा हो या पारित ना हुआ हो। 21 घंटे तक संविधान संशोधन, परिसीमन और केंद्रशासित क्षेत्र कानून संशोधन विधेयकों पर चर्चा हुई लेकिन आखिर में ये बिल गिर गया। शुक्रवार शाम 7:35 बजे इसके नतीजे आए। वोट तो कुल 528 पड़े लेकिन पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। यानी बिल पास होने के लिए बहुमत नहीं मिला। लोकसभा के कुल 540 सदस्यों में NDA के 293 और इंडी गठबंधन के 233 हैं। वोटिंग में NDA को 5 वोट ज्यादा और इंडि गठबंधन को अपनी संख्या के मुकाबले 3 बोट कम मिले। मगर बिल पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 वोट की जरूरत थी। इसका नतीजा ये रहा कि संशोधन बिल गिर गया और महिला आरक्षण एक बार फिर अटक गया।

इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि अब दूसरे दो विधेयकों परिसीमन और केंद्रशासित क्षेत्र कानून संशोधन को पेश नहीं किया जाएगा क्योंकि ये दोनों विधेयक महिला आरक्षण बिल से ही जुड़े हुए थे। ऐसे में अब ये तय हो गया है कि 33% महिला आरक्षण 2029 से लागू नहीं हो पाएगा। ये अब 2034 में ही लागू हो पाएगा। यानी 2029 के चुनाव या उससे पहले और बाद के विधानसभा चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिल पाएगा।

बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक या फिर नुकसान

महिला आरक्षण बिल फेल होने के बाद अब ये कहा जा रहा है कि ये पीएम मोदी की सरकार के लिए एक जोरदार झटका था। इससे उबरने में अब सरकार को काफी समय लगेगा। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि इस परिसीमन पर विपक्ष के विरोध के चलते बीजेपी सरकार अब लोकसभा में सीटें बढ़ाने के अपने लक्ष्य में नाकामयाब हो गई है जिसका सीधा असर उनके वोटबैंक पर पड़ेगा।

लेकिन राजनीति पंडित को अपनी अलग ही गणित लगा रहे हैं। उनका कहना है कि मोदी सरकार को पहले ही पता था कि उनका संसद में इन बिल को पास कराने के लिए बहुमत नहीं था। बावजूद इसके उन्होंने संसद का विशेष सत्र बुलाकर इन तीनों बिल को पास कराने के लिए जोखिम उठाया। यानी इसके पीछे मोदी सरकार की नीति को बेहद साफ रही होगी। अब ये नीति क्या रही होगी इस पर बात करते हैं।

दरअसल पीएम मोदी को पता था कि ये बिल पास नहीं हो पाएगा इसलिए उन्होंने विपक्षी सांसदों से समर्थन मांगा था। चाहे वो सोशल मीडिया पोस्ट से हो या फिर जनसभाओं में दिए भाषण में हो, संसद में अपने संबोधन में हो। बीते दिन भी पीएम मोदी ने संसद में कहा था कि अगर ये बिल पास होता है तो हम क्रेडिट नहीं लेंगे, हम तो बकायदा विज्ञापन छवपा देंगे कि सभी के समर्थन से ये बिल पास हुआ है। आप सभी के फोटो भी छपवा देंगे। ऐसे में पीएम मोदी और बीजेपी सरकार की ये छवि बन गई कि सरकार विपक्षियों को भी साथ लेकर चल रही है और उनके प्रति सॉफ्ट रुख अपना रही है।

दूसरा अब ये बिल गिर जाने पर देश की महिलाओं समेत जनता में ये मैसेज गया है कि कांग्रेस समेत विपक्ष उनके बारे में सोच ही नहीं रहा। क्योंकि 30 साल से ये बिल अटका हुआ है। हालांकि मोदी सरकार ने इस बिल को पास तो कराया लेकिन अब 2034 से पहले ये लागू नहीं हो पाएगा।

अब क्या करेगी मोदी सरकार?

इस बिल के फेल होने के बाद सियासी पंडित अब मोदी सरकार के सामने कुछ ऑप्शन गिना रहे हैं। पहला ये कि जिस सबसे बड़े कारण की वजह से ये बिल फेल हुआ सरकार उसमें कुछ सुधार करे। जैसे साउथ के स्टेट की हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रावधान करे। 2011 के बजाय 2027 की जनगणना का आधार ले। दूसरा विपक्ष के सुझावों को शामिल कर दोबारा इस पर समर्थन मांगे और तीसरा 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन कराए। फिर आरक्षण लागू करे।

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