SUN, 30 NOVEMBER 2025

क्या खत्म हो रहा है ‘राजे युग’? अंता उपचुनाव ने खोले नए राजनीतिक संकेत

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राजनीति
15 Nov 2025, 03:46 pm
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रिपोर्टर : Bharat Raftar

राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से चल रहे चुनावी संग्राम का अंत कल 14 नवम्बर को अंत हो गया। इस चुनावी संग्राम में अंता की जनता जनार्दन ने कांग्रेस के प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया के सर पर जीत का शहरा बांध दिया।


अंता की जीत ने कांग्रेस को एक संजीवनी का देने का काम किया है। पिछले कुछ समय से कांग्रेस के लिए कोई अच्छी खबर नहीं रही थी लेकिन अंता उपचुनाव ने कांग्रेस को फिर जिन्दा कर दिया।


अंता के चुनाव ने कांग्रेस को जहाँ संजीवनी देने का काम किया है वही बीजेपी के लिए सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

अंता विधान सभा सीट हाड़ौती में आती है। हड़ौदी राजस्थान की पूर्व CM वसुंधरा राजे सिंधिया का गढ़ माना जाता है और अंता से बीजेपी के उम्मीदवार मोरपाल सुमन को वसुंधरा राजे का करीबी माना जाता है। ऐसे में मोरपाल सुमन की हार को चुनावी पंडित वसुंधरा काल का अंत माना जा रहा है


बता दे अंता चुनाव के रिजल्ट आने के बाद राजे ने बिहार में पार्टी की जीत पर तो बधाई दे दी पर अंता पर एक शब्द भी अपने सोशल अकाउंट पर नहीं लिखा। जबकि राजे ने इस पूरे चुनाव को अपने कंट्रोल में रखा। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन तक वह अंता विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय रहीं। करीब 5 दिनों तक राजे ने यहां कैंप किया। विधानसभा के 6 मंडलों के 268 बूथों की बैक-टू-बैक मीटिंग लीं। कई समाजों के प्रतिनिधियों के साथ लंबी दौर की वार्ताए कीं।

मतदान होने तक वसुंधरा राजे सोशल मीडिया पर आकर मतदाताओं का आभार जताती रहीं। मगर पार्टी के हार जाने और कार्यकर्ताओं की मेहनत सफल नहीं होने पर राजे ने अब तक चुनाव परिणाम को लेकर कोई ट्वीट नहीं किया है ना ही कार्यकर्त्ता का आभार जताया है ना ही उन अंता वासिया का जिन्होंने राजे को अपना अमूल्य वोट देकर त्रिकोणीय मुकाबले में दूसरे नंबर पर लेकर खड़ा किया था।


पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अंता विधानसभा के कस्बे मांगरोल और अंता में रोड शो किए। खुद मुख्यमंत्री भजनलाल ने कहा था कि यह उपचुनाव 5 साल बनाम 2 साल का है। उन्होंने यह भी कहा था कि अंता की विधानसभा में भ्रष्टाचार नहीं, विकास चलेगा। लेकिन मुख्यमंत्री के बयान अंता की जनता को प्रभावित नहीं कर पाए। क्या ये इशारा नहीं है जो हाड़ौती राजे का गढ़ रहा है वहां राजे कोई भी कमाल नहीं कर पाई


लंबे समय से वसुंधरा की खेमे में लोग कयास लग रहे थे कि वसुंधरा कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है लेकिन अंता की हार के बाद अब वसुंधरा राजे को लेकर कोई भी खुशखबरी आने की उम्मीद खत्म हो चुकी है क्योंकि वसुंधरा राजे अंता में अपना जादू नहीं दिखा पाई इससे यह माना जा रहा है कि वसुंधरा राजे ने अब प्यासी तौर पर अपनी सह लगभग खोली है अंत की हार के बाद वसुंधरा राजे को लेकर सियासी जानकारों का मानना है की सक्रिय राजनीति से अब वसुंधरा राजे को विदाई ले ली नहीं चाहिए क्योंकि अब वह राजस्थान की राजनीति में कोई भी करिश्माई चेहरा नहीं रही है


चुनाव में हार-जीत होती है पर राजे का एक भी शब्द नहीं बोलना राजे की भविष्य की राजनीति पर पूर्ण विराम का इशारा कर रहा है क्या ये राजे का राजनीति से अंत की तरफ इशारा कर रहा है



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