राहुल गांधी नहीं प्रियंका गांधी होंगी कांग्रेस का चेहरा? क्या है पार्टी का नया गेम प्लान!

Rahul Gandhi Vs Priyanka Gandhi: कांग्रेस पार्टी में इन दिनों एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट आ रही है। ये बदलाव किसी छोटे-मोटे स्तर का नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के नेतृत्व का है, जिसे लेकर बीते कई दिनों से कांग्रेस की भीतरी सियासत तेज हो गई है। दरअसल ये चर्चा है राहुल गांधी और प्रियंका गांधी में से पार्टी की कमान किसे सौंपी जाए। अब ये चर्चा और तेज हो गई है जब से कांग्रेस ने अचानक प्रियंका गांधी को असम स्क्रीनिंग कमेटी की कमान पकड़ा दी। असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा जो राहुल गांधी को निशाने पर रखने का एक भी मौका नहीं छोड़ते। ये राहुल बनाम हिमंत का सालों पुराना टकराव है। इसलिए पार्टी ने इस बार प्रियंका को ढाल नहीं बल्कि तलवार के तौर पर सामने करना चाहा है। असम जीतना कांग्रेस के लिए सिर्फ रणनीति नहीं है बल्कि गांधी परिवार का पर्सनल बैटल बन चुका है।
कांग्रेस में उठ रही प्रियंका गांधी को बड़ी जिम्मेदारी देने की मांग
सांसद प्रियंका गांधी ने संसद के शीतकालीन सत्र में जो भाषण दिए हैं, उसकी भी पार्टी में खूब चर्चा है। ये सुझाव दिया जा रहा है कि अब प्रियंका को बड़ा रोल दिया जाए। फिर धीरे-धीरे फैसले होते गए। जिसमें कमेटियां, ज़िम्मेदारिया, लीडरशिप सब फाइनल होता गया। वहीं ये भी कम दिलचस्प नहीं कि प्रियंका के करीबियों को एक-एक कर उनके साथ तैनात किया जा रहा है। चाहे बात भूपेश बघेल की हो, डीके शिवकुमार की हो या जितेंद्र सिंह, इमरान मसूद हों। मतलब साफ है कि प्रियंका के लिए नया पॉलिटिकल प्लेटफॉर्म तैयार हो रहा है और ये सब गांधी परिवार की सहमति से हो रहा है। ऐसा दावा पार्टी के भीतर से ही किया जा रहा है। यानि अब देश की सबसे पुरानी पार्टी के सेंटर ऑफ ग्रेविटी बदलने की तैयारी शुरू हो गई है।
प्रियंका गांधी के हाथ में आई कमान तो राहुल गांधी क्या करेंगे?
कई सियासी जानकारों का ये भी कहना है कि ये सब कुछ प्रियंका को भावी कांग्रेस प्रमुख या प्रधानमंत्री चेहरे की तरफ ले जाने की रणनीति है। ये तो पार्टी के कई नेता भी कह चुके हैं। जिसमें इमरान मसूद भी शामिल हैं, जो सीधे कह चुके हैं। कि प्रियंका गांधी को प्रधानमंत्री बनना चाहिए। लेकिन यहां एक ट्विस्ट भी है और सवाल भी कि अगर प्रियंका ऊपर आती हैं तो राहुल गांधी का रोल क्या होगा? क्या वो बैकएंड स्ट्रैटेजिस्ट बनेंगे? या चुनावी चेहरे में बदलाव कांग्रेस की अब मजबूरी बन गई है? दरअसल सियासी जानकारों का कहना है कि आने वाले 3-4 महीनों में ये साफ हो जाएगा कि पार्टी में प्रियंका की भूमिका सिर्फ चुनावी रणनीति है या भविष्य का नेतृत्व सौंपने की तैयारी की जा रही है? पार्टी के नेताओं का मानना है कि प्रियंका गांधी महिला और युवा मतदाताओं को जोड़ने की ताकत रखती हैं। वही बीजेपी के आक्रामक राष्ट्रवादी नैरेटिव को भी जवाब दे सकती हैं वो भी सॉफ्ट लेकिन धारदार सियासी तरीके से।ऐसे में सवाल ये है कि क्या प्रियंका गांधी ही अब कांग्रेस का भविष्य हैं? क्या 2026-2029 के बीच उनकी इमेज महज ‘नेता’ से बढ़कर ‘नेतृत्व’ तक पहुंच जाएगी या ये सब कांग्रेस का डैमेज कंट्रोल है? ये आने वाला वक्त बताएगा।
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