गहलोत आवास पर सियासी खिचड़ी! रंधावा-डोटासरा की मीटिंग में क्या पक रहा है?”

Rajasthan Congress Politics: राजस्थान की सियासत में एक बार फिर तापमान बढ़ चुका है। गहलोत आवास पर पीसीसी चीफ डोटासरा और प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर रंधावा (Sukhjindar Singh Randhawa) की मीटिंग हुई, जिसकी अब सियासी गलियारों में जोरों-शोरों से चर्चा हो रही है कि मीटिंग में बात क्या हुई। क्योंकि इन तीनों नेताओं की इस बैठक की तस्वीर डोटासरा और गहलोत ने अपने-अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर की है। डोटासरा ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया, तो वहीं गहलोत (Ashok Gehlot) ने लिखा कि जयपुर आवास पर रंधावा और डोटासरा से मुलाकात की। लेकिन सियासी जानकारों का कहना है कि सुखजिंदर सिंह रंधावा और गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasara) के साथ गहलोत की घंटों चली बैठक—सिर्फ शिष्टाचार नहीं थी। ये पंचायत और निकाय चुनाव की बैटल प्लान मीटिंग थी।
जानकारों का कहना है कि कांग्रेस ये तय चुकी है कि इस बार लोकल चुनाव को लोकल रहने नहीं दिया जाएगा। कांग्रेस इसे एक बड़े राजनीतिक संदेश में बदलना चाहती है और इस बैठक में सबसे बड़ा फोकस भी ये रहा होगा कि बूथ पर संगठन को जगा दो, वरना कुछ नहीं बदलेगा। ऐसे में कांग्रेस ने ठान लिया है कि बूथ-स्तर पर टीम को एक्टिव करना होगा। स्थानीय नेताओं को ज्यादा जिम्मेदारी दी जाएगी। और जिलाध्यक्ष तो चुनाव के बैकबोन हैं ही।
वहीं, मीटिंग का सबसे हॉट टॉपिक ये भी रहा कि बीजेपी से आने वाले नेताओं को टिकट देना है या नहीं। लेकिन रंधावा ने साफ कर दिया कि जो भी आएगा, पहले संगठन की कसौटी पर तोला जाएगा - सीधे टिकट नहीं मिलेगा। यानी कांग्रेस इस बार दलबदलुओं को लेकर बहुत सावधान है। ये संदेश सीधा उन नेताओं के लिए है, जो चुनाव के वक्त ‘प्रवासी पक्षी’ बनकर आते हैं। वहीं रणनीति का दूसरा मोर्चा विधानसभा भी है। गहलोत-रंधावा-डोटासरा ने तय किया कि विपक्ष के तौर पर कांग्रेस इन मुद्दों पर सरकार को कसकर घेरने वाली है- जैसे महंगाई, बेरोजगारी, मनरेगा में बदलाव।
दूसरी तरफ ये भी सवाल है कि इस मीटिंग की फोटो पोस्ट कर कांग्रेस क्या संदेश देना चाहती है - कि कांग्रेस पूरी तरह एक्टिव मोड में है। बहरहाल, ये तो आने वाले वक्त में ही पता चलेगा, लेकिन इस चर्चा ने सियासी चर्चाओं का जो बाजार गर्म किया है, वो काफी दिलचस्प होने वाला है।
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