गौरक्षकों पर लाठीचार्ज! गौहत्या के विरोध में बैठे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का दमन, 2 घायल, 9 हिरासत में; बाद में आईजी ने की बैठक

Baran Gau-rakshak Rally Lathicharge: गौरक्षा और गौ-हत्यारों को सज़ा दिलाने की मांग करने वालों गौ-रक्षा दल के सदस्यों पर लाठीचार्ज हुआ है। सोमवार को राजस्थान के बारां में हुई गौहत्या के विरोध में शांतिपूर्ण रैली निकाल रहे गौरक्षकों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस लाठीचार्ज में दो लोग घायल हुए और पुलिस ने आधा दर्जन से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
प्रदर्शनकारी गौहत्या के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे, लेकिन पुलिस की इस कार्रवाई ने सवाल उठा दिया है कि क्या न्याय की मांग करने वालों का दमन करना उचित है? हालाँकि, देर शाम कोटा से आईजी राजेंद्र गोयल बारां पहुंचे, जहाँ उन्होंने स्थानीय विधायक और गौरक्षक दल के प्रतिनिधियों से बात की, जिसके बाद उन्होंने सभी मांगे मानते हुए हिरासत में लिए गए 9 लोगों को रिहा कर दिया।
घटना की शुरुआत शुक्रवार 6 फ़रवरी को हुई, जब शहर में एक बछड़े का कटा हुआ शव मिला। स्थानीय गौरक्षा संगठनों और हिंदू दलों ने इसे गौहत्या का मामला बताया और प्रशासन से मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। इसी के चलते, सोमवार 8 फ़रवरी को शहर बंद का भी ऐलान किया गया, जिसके चलते शहर के बाजार बंद रहे और प्रताप चौक पर सैकड़ों गौसेवक इकट्ठा हो गए। सभी गौरक्षक ने वहां धरना शुरू कर दिया, शांतिपूर्ण रैली निकाली और कलेक्टर से मिलने की मांग करने लगे। उनकी मुख्य मांगें थीं कि मामले में एफआईआर दर्ज की जाए, दोषियों को कड़ी सजा दी जाए और जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो।
लेकिन इस धरने और शांतिपूर्वक रैली का माहौल दोपहर में अचानक बदल गया। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर घटना के कई विडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें साफ़ नज़र आ रहा है कि पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों के पीछे लाठियां लेकर भाग रहे हैं और उन लाठियां बरसाते नजर आ रहे हैं। लाठीचार्ज से मौके पर तुरंत ही भगदड़ और अफरा-तफरी मच गई। बाद में प्रदर्शनकारियों की तरफ़ से पथराव भी हुआ, जिसके चलते पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे।
बारां जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर का कहना है कि शहर बंद और प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग भड़क गए थे। भीड़ आक्रामक होने लग गयी थी, जिसके बाद लाठीचार्ज किया गया। हमने स्थिति को नियंत्रित किया और अब शांति बहाल है। वहीं, गौरक्षकों का आरोप है कि सरकार उनकी आवाज दबा रही है। भाजपा नेता अशोक गौर ने सोशल मीडिया पर लिखा, "गौ रक्षा और हिंदुत्व के लिए चुनी गई सरकार न्याय की मांग पर लाठियां क्यों बरसा रही है? यह अस्वीकार्य है।"
बारां में पहले भी गौ रक्षा से जुड़े विवाद हो चुके हैं, लेकिन इस बार भाजपा सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। क्या गौ रक्षा का वादा सिर्फ चुनावी जुमला था?
देर शाम आईजी राजेंद्र गोयल ने स्थानीय विधायक और गौरक्षक दल के प्रतिनिधियों सहित कई लोगों से बात की, जिसके बाद उनकी सभी मांगे मान ली गयी। विधायक राधेश्याम बैरवा ने बताया कि गौ-रक्षकों की सभी मांगों पर सहमति बन गई है। इसमें मामले की निष्पक्ष जांच, गौशाला के लिए भूमि आवंटन, डंपिंग यार्ड को शहर से बाहर बनाना और गौ एम्बुलेंस के लिए विधायक कोष से 10 लाख रुपए स्वीकृत करना शामिल है। साथ ही, हिरासत में लिए गए सभी 9 लोगों को छोड़ दिया गया है।
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