ममता के गढ़ में राजस्थान की एंट्री! CM भजनलाल समेत इन नेताओं पर BJP का चुनावी दांव

ममता के गढ़ में राजस्थान की एंट्री! CM भजनलाल समेत इन नेताओं पर BJP का चुनावी दांव
राजस्थान
17 Mar 2026, 03:22 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Rajasthan Leaders in West Bengal elections: ममता बनर्जी का किला और उसे तोड़ने के लिए बीजेपी का नया हथियार बन गया है राजस्थान। जी हां, बंगाल की सियासत में अब एंट्री हुई है, राजस्थान के बड़े नेताओं की। इनमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, जैसे ही ममता बनर्जी के गढ़ में चुनावी बिगुल बजा। भारतीय जनता पार्टी ने अपना मास्टर प्लान एक्टिव कर दिया। पार्टी हाईकमान ने राजस्थान के नेताओं को सीधे बंगाल के मैदान में उतार दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajan Lal Sharma) और मदन राठौड़ बंगाल में रैलियां करेंगे और प्रवासी सम्मेलन के जरिए सीधा कनेक्ट बनाएंगे। सिर्फ बड़े चेहरे ही नहीं, बल्कि पूरी टीम एक्टिव हो चुकी है। इनके साथ डॉ. मनोज राजोरिया, अशोक सैनी, मोतीलाल मीणा और कई अनुभवी नेता अलग-अलग सीटों पर तैनात किए गए हैं।

कैलाश चौधरी को भी बंगाल की कमान

इनके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री और किसान नेता कैलाश चौधरी को भी मैदान में उतारा गया है। ये संगठन और किसान राजनीति दोनों में मजबूत पकड़ रखते हैं। इनके साथ ही जितेंद्र गोठवाल, अतुल भंसाली और लादू लाल तेली जैसे नेता भी होंगे। यानी बीजेपी का मकसद साफ है कि पश्चिम बंगाल में सिर्फ चुनाव नहीं लड़ना है बल्कि हर सीट पर रणनीति के साथ कब्जा करना। अब राजस्थान के इन नेताओं की जिम्मेदारी है- बूथ लेवल तक पार्टी के नेटवर्क मजबूत करना और कार्यकर्ताओं को आक्रामक मोड में लाना।

बंगाल के राजस्थानी वोट बैंक पर नजर

दरअसल यहां पर बीजेपी का सबसे बड़ा दांव प्रवासी राजस्थानी वोट बैंक है। बंगाल की कई सीटों पर मारवाड़ी समाज निर्णायक भूमिका में है। इसी को साधने के लिए बीजेपी ने ‘राजस्थान कनेक्शन’ एक्टिव किया है। इनका काम है लोकल स्तर पर माहौल बनाना और ममता सरकार के खिलाफ आक्रामक नैरेटिव तैयार करना। ममता बनर्जी पहले ही ‘बाहरी बनाम बंगाली’ का मुद्दा उठा चुकी हैं।

अब बीजेपी उसी नैरेटिव को पलटने की कोशिश में है राजस्थान के नेताओं के जरिए ‘प्रवासी एकता’ का कार्ड खेला जा रहा है। लेकिन सवाल वही कि क्या ये रणनीति वाकई ममता के किले को हिला पाएगी? बंगाल का चुनाव अब सिर्फ लोकल नहीं रहा ये बन चुका है ‘रणनीति vs रणनीति’ की जंग। एक तरफ ममता बनर्जी और दूसरी तरफ बीजेपी का राजस्थान मॉडल, अब देखना ये है कि इसमें बाजी कौन मारेगा।


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