THU, 15 JANUARY 2026

जयपुर में इलेक्ट्रोपैथी विशेषज्ञों का महाकुंभ, डिप्टी CM प्रेमचन्द बैरवा ने रखा विजन

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जयपुर
12 Jan 2026, 11:35 am
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रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Jaipur: राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर यानी RIC में 'विश्व इलेक्ट्रोपैथी दिवस' के मौके पर कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस दिन इस पद्धति के जनक काउंट सीजर मैटी का जन्मदिवस भी होता है. ये कार्यक्रम राजस्थान इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा पद्धति बोर्ड ने आयोजित किया.जिसमें प्रदेश भर के डॉक्टर्स ने हिस्सा लिया. इस प्रोग्राम के मुख्य अतिथि डिप्टी सीएम और आयुष मंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा रहे. उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित भी किया. उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस यानी दवाओं के बेअसर होने के संकट से जूझ रही है. तब इलेक्ट्रोपैथी की स्पैजीरिक दवाइयां एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रही हैं.


इलेक्ट्रोपैथी पर बजट में भी होगा प्रावधान


वहीं मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने भी अपने वीडियो संदेश के जरिए डॉ. सेठिया के नेतृत्व की सराहना की और इलेक्ट्रोपैथी को एकीकृत आयुष नीति 2025 का हिस्सा बताते हुए इसे ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया.

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि रिसर्च के मुताबिक इलेक्ट्रोपैथी की 'ग्रीन इलेक्ट्रिसिटी' घावों को 96% तेजी से भरती है. उन्होंने ये भी कहा कि बोर्ड के सुचारु संचालन के लिए नए पदों की भर्ती निकाली जाएगी और आगामी बजट में इलेक्ट्रोपैथी के विकास के लिए विशेष प्रावधान भी किए जाएंगे. डॉ. बैरवा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा इलेक्ट्रोपैथी को लेकर गंभीर हैं और जल्द ही 10 करोड़ के प्रस्तावित बजट पर फैसला लेंगे.


वहीं इस प्रोग्राम के दौरान मोस्टअवेटेड न्यूज़लेटर 'द इलेक्ट्रोपैथी संवाद' पार्ट-2 का विमोचन भी किया गया. ये न्यूज़लेटर इस पद्धति की वैज्ञानिक प्रामाणिकता को सिद्ध करने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है. इसमें कहा गया है कि पेटोरेल, बिना स्टेरॉयड के सांस की नली की सूजन कम करने में कारगर है. C-15 दवा पेट की समस्याओं और दर्द निवारण में काम करती है. वहीं A-2 दवा किडनी को नुकसान पहुँचाए बिना इबुप्रोफेन जैसी एलोपैथिक दवाओं का सुरक्षित विकल्प है.


फर्जी सर्टिफिकेट वालों को बख्शा नहीं जाएगा- प्रेमचंद बैरवा


इसके अलावा इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा परिषद् के अध्यक्ष हेमंत सेठिया ने अपने संबोधन में कहा कि इलेक्ट्रोपैथी अब संघर्ष के दौर से निकलकर वैश्विक स्वीकार्यता की तरफ बढ़ चुकी है. उन्होंने राजस्थान में एक ऐसे 'दिव्य भवन' के निर्माण की मांग रखी जो रिसर्च, चिकित्सा और शिक्षा का केंद्र हो और पूरे भारत के लिए मिसाल बने. उन्होंने साफ किया कि राजस्थान में शिक्षा और चिकित्सा के नियमों का कड़ाई से पालन होगा और फर्जी सर्टिफिकेट देने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.


इसके अलावा कार्यक्रम में आयुष विभाग के प्रमुख शासन सचिव और बोर्ड अध्यक्ष सुबीर कुमार ने भरोसा जताया कि सरकार के सहयोग से अगले 2 सालों में ये विधा पूरी तरह स्थापित हो जाएगी. वहीं, बोर्ड के रजिस्ट्रार डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने बोर्ड की प्रगति रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि वेबसाइट और नए पदों के सृजन से कार्यों में तेजी आई है.


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