फ्रांस ने खोल दी राजस्थान की नौकरशाही की पोल, जानिए क्या है पूरा मामला

फ्रांस ने खोल दी राजस्थान की नौकरशाही की पोल, जानिए क्या है पूरा मामला
राजस्थान
28 Mar 2026, 05:45 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

France Ambassador on Rising Rajasthan: राजस्थान की सियासत इन दिनों एक ही बात पर अटकी हुई है—निरंकुश नौकरशाही। इसी से एक टर्म सामने आया ‘राइजिंग कमीशन’। फ्रांस के राजदूत का लेटर सामने आने के बाद पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में है। क्या वाकई अफसरशाही सरकार की छवि को चोट पहुंचा रही है? क्योंकि मंत्रियों से लेकर कई विधायक, यहां तक कि पूर्व CM वसुंधरा राजे और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तक, सब एक सुर में शिकायत कर रहे हैं कि सिस्टम हाथ से निकल चुका है। लेकिन मसला तब और गर्म हो गया जब फ्रांस के राजदूत थिएरी माथौ ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (CM Bhajan Lal Sharma) को सीधे एक चिट्ठी भेज दी।

इस लेटर में आरोप क्या हैं?

RIICO के अधिकारियों पर जमीन आवंटन में देरी, रेट में मनमानी और 1200 करोड़ लगाने वाली फ्रांस की बड़ी कंपनी सॉफ्लेट माल्ट इंडिया को अब तक जमीन तक नहीं मिली। ना कीमत तय, ना समय पर अलॉटमेंट, उल्टा डेडलाइन बढ़ा दी गई दिसंबर 2026 तक। दूसरी तरफ ये चिट्ठी बाहर आते ही कांग्रेस ने मौके को लपक लिया। गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली ने सीधे हमला बोला कि “राइजिंग राजस्थान नहीं, राइजिंग कमीशन य़े है।“ यानी सरकार निवेशकों को बुला तो रही है, लेकिन जमीन पर उतरते-उतरते निवेश दम तोड़ देता है। टीकाराम जूली ने तो साफ कह दिया कि “जो बात मैं विधानसभा में कहता आया हूं, वही फ्रांस के राजदूत ने भी लिख दी। सरकार बस शोबाजी कर रही है।” नेता प्रतिपक्ष ने एक कदम आगे बढ़कर कहा, “राइजिंग राजस्थान का हाल… जॉकिंग ऑफ राजस्थान जैसा हो गया है।”

7 लाख करोड़ के समझौते, 3 लाख करोड़ का काम अब तक नहीं

सरकार दावा करती है कि 7 लाख करोड़ के MoU हुए हैं, लेकिन 3 लाख करोड़ का निवेश अभी तक धरती पर नहीं दिखा है। सरकार की दलील है कि बड़े निवेश में समय लगता है, लैंड क्लियरेंस मुश्किल होते हैं, एनवायरमेंट अप्रूवल जटिल है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब राजदूत की चिट्ठी तक बाहर आ रही है, तब क्या सिस्टम में कोई गहरी खामी छिपी हुई है? क्या ये पूरा मामला “राइजिंग राजस्थान” के असली हालात को बेनकाब कर रहा है और क्या अफसरशाही और सरकार के बीच तालमेल की कमी पूरे निवेश माहौल को चोट पहुंचा रही है? राजस्थान का भविष्य निवेश पर टिका है लेकिन यदि फाइलें ही रोक देंगी तो ‘राइजिंग राजस्थान’ सिर्फ इवेंट बनकर रह जाएगा। सवाल बड़ा है कि क्या सरकार सिस्टम पर काबू कर पाएगी या निवेशकों का भरोसा और डगमगाएगा?


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