तेजाजी मत बनो...हनुमान बेनीवाल के खिलाफ खड़ी हुई जाट महासभा, जाट पॉलिटिक्स में नया ट्विस्ट!

Hanuman Beniwal: राजस्थान की राजनीति में एक कहावत है 'सियासत में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता'। लेकिन आज जो हम देख रहे हैं, वो दोस्ती या दुश्मनी से कहीं ऊपर वर्चस्व की जंग है। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल, जो खुद को जाट राजनीति का शेर मानते हैं। वो आज अपने ही समाज के सबसे बड़े संगठन जाट महासभा के निशाने पर हैं। जी हां, राजाराम मील पर बयानबाजी और उनके घऱ पर RLP समर्थकों के हंगामे से महासभा बेहद नाराज हुई है।
Hanuman Beniwal पर क्या कहा जाट महासभा ने?
इस विवाद पर जाट महासभा (Jaat Mahasabha) के प्रदेश प्रवक्ता कृष्ण कुमार जानू ने बेनीवाल पर बड़ा निशाना साधा है। जो ये बताता है कि समाज के भीतर अब बेनीवाल की कार्यशैली को लेकर असंतोष पनपने लगा है। जानू ने कहा कि "बेनीवाल जी, राजनीति करिए, तेजाजी बनने का प्रयास मत करिए"। सियासी जानकारों का कहना है कि ये एक सीधा प्रहार है उस छवि पर जो बेनीवाल ने सालों की मेहनत से खड़ी की है।
दूसरे पायदान पर खिसक रही जाट पॉलिटिक्स
दरअसल हनुमान बेनीवाल हमेशा 'जाट मुख्यमंत्री' और 'किसान शक्ति' की बात करते हैं। लेकिन महासभा का आरोप है कि उनकी तीखी जुबान और व्यक्तिगत हमलों ने समाज को एकजुट करने के बजाय बांट रही है। इधर राजस्थान की दोनों मुख्य पार्टियों BJP और Congress में जाट राजनीति अब दूसरे पायदान पर खिसकती हुई दिखाई दे रही है। जानू ने सीधा सवाल उठाया है कि क्या इस पतन के जिम्मेदार बेनीवाल खुद हैं? जब नेतृत्व सिर्फ अपनी दिखावे में लग जाए और समाज के बड़े बुजुर्गों जैसे राजाराम मील को दरकिनार करने लगे, तो दरार पड़ना लाजिमी है। अगर बेनीवाल ने अपनी 'रफ़्तार' पर ब्रेक नहीं लगाया, तो जानू के अनुसार समाज उनसे दूरी बना लेगा। यह बेनीवाल के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है कि सिर्फ हुंकार भरने से काम नहीं चलेगा, समाज को साथ लेकर चलना होगा।
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