“75 साल के हो गए, कुछ दिन बाद उनकी ‘बैठक’ में जाना पड़ेगा”, मील पर ये क्य़ा बोल गए हनुमान बेनीवाल

Hanuman Beniwal Rajaram Meel Politics: बीते दिनों से राजस्थान की सियासत कांग्रेस-बीजेपी के हटकर जाट पॉलिटिक्स पर आकर केंद्रित हो गई है। जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील और बेनीवाल के बीच चल रही जुबानी जंग के चलते जो समर्थकों ने राजनीतिक विस्फोट किया। उसका धुआं अब इतना गहरा गया है कि इसमें क्या सही है और क्या गलत? नेता कुछ नहीं समझ रहे। राजाराम मील के विवादित बयानों पर हनुमान बेनीवाल ने तंज कसा और ऐसी बात बोल दी जिसकी चर्चा सियासी हलकों और जाट समाज में होने लगी है।
ओवर एज हो गए उनकी तो बैठक में जाना पड़ेगा
हनुमान बेनीवाल ने एक कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए राजाराम मील के बयानों और इसके बाद RLP समर्थकों के विरोध प्रदर्शनों पर बात की। उन्होंने कहा कि 'अरे भाई, वो अब ओवर-एज हो गए हैं, छोड़ो उनको! उनसे मेरा क्या झगड़ा? राजनीति में ऐसी बयानबाजी तो चलती रहती है।' लेकिन हनुमान बेनीवाल यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे जो बोला वो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। बेनीवाल ने कहा कि '80-85 साल के बुजुर्गों से मेरा क्या लेना-देना? अब तो थोड़े दिनों में मुझे उनके घर पर बैठक (शोक जताने) में जाना पड़ेगा। अब इस उम्र में उनसे क्या लड़ना!”
मील को सियासी लड़ाई के लायक भी नहीं समझ रहे बेनीवाल?
एक तरफ जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील ने गंभीर और निजी आरोप लगाए, दूसरी तरफ बेनीवाल ने उन्हें सीधे 'रिटायरमेंट' और 'उम्र' का हवाला देकर किनारे कर दिया। इस पर सियासी जानकारों का कहना है कि राजनीति में इसे सबसे बड़ा अपमान माना जाता है जब आप अपने विरोधी को लड़ने लायक ही न समझें! लेकिन, यहां एक बड़ा सवाल खड़ा होता है। क्या एक इतने बड़े संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को, एक जननायक को इस तरह की भाषा शोभा देती है?
एक तरफ 'नशेड़ी' जैसे शब्द और दूसरी तरफ 'घर बैठने जाना होगा' जैसे तंज... क्या राजस्थान की राजनीति का स्तर अब व्यक्तिगत दुश्मनी में बदल चुका है? बहरहाल ये मामला और कितना आगे खिंचेगा ये तो वक्त आने पर ही पता चलेगा लेकिन इतना तय है कि ये मुद्दा अब जाट पॉलिटिक्स को बदल सकता है।
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