960 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में IAS सुबोध अग्रवाल गिरफ्तार! इन बड़े आरोपों के साथ आज कोर्ट में पेशी

960 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में IAS सुबोध अग्रवाल गिरफ्तार! इन बड़े आरोपों के साथ आज कोर्ट में पेशी
राजस्थान
10 Apr 2026, 02:44 pm
रिपोर्टर : Dushyant

IAS Subodh Agarwal Arrested: जल जीवन मिशन में 960 करोड़ के टेंडर के घोटालों में भगोड़ा घोषित होने वाले 4 मुख्य आरोपियों में से एक – IAS सुबोध अग्रवाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया। ACB की 18 टीमों ने 51 दिनों तक कई ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन जब आरोपी पकड़ में नहीं आए, तो उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया। भगोड़ा होने के 2 दिन बाद ही गुरुवार को ACB ने दिल्ली से IAS सुबोध अग्रवाल को हिरासत में ले लिया।

ACB की जाँच में सुबोध अग्रवाल पर आरोप लगे कि उन्होंने PHED में ACS पद पर कार्यरत रहने के दौरान दो कंपनियों को जल जीवन मिशन के तहत होने वाले टेंडरों में बड़ा घोटाला और भ्रष्टाचार किया। सुबोध ने मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल और श्री श्याम ट्यूबवेल नामक कंपनियों को JJM के तहत 960 करोड़ के टेंडर दिलाए और उनके खिलाफ मिलने वाली शिकायतों को भी नज़रंदाज़ कर दिया। इन कंपनियों के मालिकों पर आरोप हैं कि उन्होंने केरल की कंपनी इरकॉन (IRCON) के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर टेंडर हासिल किए। (Jal Jeevan Mission Scam)

बाद में जब शिकायतें सामने आई, तो सुबोध ने अपने ख़ास इंजिनियर विशाल सक्सेना को जाँच के लिए केरल भेजा, जिसने मामले में और मिलीभगत करके फर्जी प्रमाण पत्रों को वेरीफाई कर दिया। बाद में इरकॉन कंपनी ने खुद मेल भेजकर शिकायत की, लेकिन उसे भी नज़रंदाज़ कर दिया गया।

सुबोध अग्रवाल पर लगे ये बड़े आरोप

  1. जिस वक़्त सुबोध अग्रवाल PHED में जल जीवन मिशन के काम से जुड़े हुए थे, उस दौरान दोनों फर्मों के खिलाफ फर्जी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल करने और टेंडर पाने की कई शिकायतें प्राप्त हुई थी। इसके बावजूद दोनों फर्म को टेंडर पास किए गए और करोड़ों के टेंडर दे दिए।
  2. जब फर्जी प्रमाण पत्रों की शिकायत हुई, तब सुबोध ने सर्टिफिकेट्स की जाँच के लिए अपने ख़ास इंजिनियर विशाल सक्सेना को केरल भेजा। उसने भी फर्जीवाडा किया और पॉजिटिव रिपोर्ट्स लेकर वापस आ गया और मामला दबाने की कोशिश की गयी।
  3. 7 जून 2023 को इरकॉन ने खुद लैटर और मेल लिखकर फर्जी सर्टिफिकेट्स की खबर PHED को दी थी और कहा था कि श्री श्याम ट्यूबवेल और गणपति ट्यूबवेल ने जो प्रमाण पत्र दिए हैं, जो नकली है। इसके बावजूद भी सुबोध अग्रवाल ने कोई कार्रवाई नहीं की, ना ही कोई जाँच बैठाई।
  4. इंजिनियर विशाल ने गिरफ़्तारी के बाद अपने बयान में कहा कि फर्जी सर्टिफिकेट्स को वेरीफाई करने और पॉजिटिव रिपोर्ट भेजने के लिए उसे उच्चाधिकारियों से आदेश थे, जिनमें सुबोध अग्रवाल का भी नाम शामिल था। क्या सुबोध ने विशाल पर दबाव बनाया था?
  5. इतना सब कुछ होने के बाद भी सुबोध ने सभी शिकायतों और जांचों को एक तरफ सरकाते हुए उन्हीं फर्जी कागज़ों के आधार पर फिर से उन्हीं कंपनियों को टेंडर दे दिए। इसका मतलब सुबोध खुद इस पूरे घोटाले और फर्जीवाड़े के भ्रष्टाचार में शामिल था।

फ़िलहाल मामले की कोर्ट में सुनवाई चल रही है, जहाँ सुबोध अग्रवाल को कोर्ट में पेश किया गया है। ACB ने पूछताछ के लिए 5 दिनों की रिमांड की मांग की है।


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