जल जीवन मिशन घोटाला में सुबोध अग्रवाल समेत 4 IAS अंडरग्राऊंड, 10 गिरफ्तार, 4 दिन की रिमांड पर 9 इंजीनियर

जल जीवन मिशन घोटाला में सुबोध अग्रवाल समेत 4 IAS अंडरग्राऊंड, 10 गिरफ्तार, 4 दिन की रिमांड पर 9 इंजीनियर
राजस्थान
18 Feb 2026, 06:34 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

JJM Scam: राजस्थान में भ्रष्टाचार के सबसे बड़े खुलासों में से एक जल जीवन मिशन में करोड़ों नहीं बल्कि सैकड़ों करोड़ का घोटाला हुआ। अब इस घोटाले में बड़े-बड़े अफसरों पर शिकंजा कसता जा रहा है। पूर्व IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल समेत 4 IAS अधिकारी तो अंडरग्राऊंड हो गए हैं। वहीं जिन 10 इंजीनियर्स को बीते दिन गिरफ्तार किया था उनमें से 9 लोगों की 4 दिन की रिमांड कोर्ट ने ACB को दी है।

ACB ने बेहद कड़ी सुरक्षा के साथ इन्हें कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी आरोपियों को 21 फरवरी को दोबारा पेश करने के निर्देश दिए हैं। इधर, कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए ACB ने इस मामले में दसवें आरोपी की भी गिरफ्तारी कर ली है। आरोपी मुकेश पाठक, जो दलाली के मामले में संदेह के दायरे में था, उसे छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से पकड़ा गया है। ACB उसे भी कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी में है।

कौन-कौन हुए गिरफ्तार?


एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्ता के मुताबिक, जिन अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है उनमें शामिल हैं—


मुख्य अभियंता (प्रशासन) दिनेश गोयल


मुख्य अभियंता (ग्रामीण) के.डी. गुप्ता


पूर्व सचिव सुभांशु दीक्षित


वित्तीय सलाहकार सुशील शर्मा


मुख्य अभियंता (चूरू) निरिल कुमार


निलंबित अधिशासी अभियंता विशाल सक्सेना


सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण श्रीवास्तव


सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता दिलीप कुमार गौड़


सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता महेंद्र प्रकाश सोनी


टेंडर हासिल करने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए

बता दें कि मिशन में घोटाले में फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए करीब 960 करोड़ रुपए के टेंडर में बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। सबसे बड़ी गिरफ्तारी हुई जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग यानी PHED के चीफ इंजीनियर दिनेश गोयल की, जिन्हें उदयपुर के पांच सितारा होटल Taj Aravali Resort & Spa से पकड़ा गया। वहीं जोधपुर में तैनात से विशाल सक्सेना को बाड़मेर रेलवे स्टेशन से हिरासत में लिया गया।

जांच में सामने आया है कि जल जीवन मिशन यानी जल जीवन मिशन के तहत टेंडर हासिल करने के लिए IRCON International लिमिटेड के नाम से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए गए। इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए निजी फर्मों को करोड़ों रुपए के टेंडर दिलाए गए।

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि विभाग में कमीशन का खेल खुलेआम चलता था। शाम होते ही पोर्च में गाड़ियां पहुंचती थीं, जिन्हें अधिकारी ‘कैश वैन’ कहकर बुलाते थे। फाइलें खुद गाड़ियों तक पहुंचाई जाती थीं और देर रात तक पैसों के लेन-देन की चर्चा होती थी।

ACB की Special Investigation Team यानी SIT इस मामले के चार बड़े प्रोजेक्ट्स की जांच कर रही है… जिनकी कुल लागत करीब 20 हजार करोड़ रुपए बताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि बिना काम किए ही करीब 55 करोड़ रुपए का फर्जी भुगतान किया गया। अब सवाल यह है कि क्या इतने बड़े स्तर पर हुआ यह भ्रष्टाचार सिर्फ कुछ अधिकारियों तक सीमित है? या फिर इसमें और बड़े नाम सामने आएंगे? फिलहाल एसीबी की कार्रवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस घोटाले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

 


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