खेजड़ी मुद्दे पर बीकानेर में अनशन तो टूटा लेकिन धरना अभी भी जारी, जानिए अब क्या मांग कर रहे प्रदर्शनकारी

Khejri Bachao Andolan: राजस्थान में राजकीय वृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए चल रहा जनआंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीकानेर में पिछले पांच दिनों से चल रहे महापड़ाव में देर रात बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब 500 से अधिक लोगों ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। सदन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने खेजड़ी पर जोधपुर बीकानेर में कानून बनाने का ऐलान किया। हालांकि आंदोलनकारियों (Bikaner Andolan) ने साफ कर दिया है कि उनका धरना अभी जारी रहेगा, क्योंकि अब उनकी लड़ाई सिर्फ एक जिले की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में मजबूत वृक्ष संरक्षण कानून लागू करवाने की है।
सरकार से मिले आश्वासन, लेकिन भरोसा अधूरा
बुधवार को उद्योग राज्य मंत्री के.के. बिश्नोई ने धरना स्थल पहुंचकर आंदोलनकारियों से बातचीत की और बताया कि जोधपुर और बीकानेर संभाग में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि मौजूदा विधानसभा सत्र में ‘ट्री एक्ट’ लाने पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।
सरकार के इस भरोसे के बाद संतों ने सबसे पहले अनशन तोड़ा, जिसके बाद दूसरे अनशनकारियों ने भी अपना उपवास खत्म किया। लेकिन आंदोलन स्थल पर इस पर ही बवाल हो गया। बाकी प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि वो सिर्फ दो संभागों की बात नहीं कर रहे बल्कि पूरे राजस्थान में कानून की मांग कर रह हैं। जब तक कानून पूरे राजस्थान को कवर नहीं करेगा, उनका धरना जारी रहेगा।
आंदोलनकारियों का सवाल: सिर्फ दो संभाग ही क्यों?
धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक हिस्से का मुद्दा नहीं हो सकता। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि बीकानेर और जोधपुर में कटाई पर रोक जरूर लगी है, लेकिन नागौर और पाली जैसे जिलों में अभी भी हरे पेड़ों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उनकी मांग है कि जब तक ‘ट्री एक्ट’ कानून का रूप नहीं ले लेता, पूरे राजस्थान में पेड़ों की कटाई पर एक अस्थायी और स्पष्ट रोक लगाई जाए।
राजस्थान में ‘ट्री एक्ट’ की मांग क्यों तेज?
आंदोलन अब केवल खेजड़ी के लिए नहीं, बल्कि समूचे पर्यावरण संरक्षण के लिए एक बड़ी मुहिम बन चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है—
-पूरे राज्य में हरे पेड़ों की कटाई पर तुरंत पूर्ण रोक लगे।
-विधानसभा के इसी सत्र में ‘ट्री एक्ट’ पारित किया जाए।
-कानून में पेड़ काटने वालों पर सख्त दंड और कड़ी कार्रवाई का प्रावधान हो।
-जब तक कानून लागू नहीं होता, सरकार एक प्रशासनिक आदेश जारी कर पूरे राज्य में पेड़ों की कटाई रोक दे।
लोगों का कहना है कि खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि राजस्थान की संस्कृति, पहचान और पारिस्थितिकी का अहम हिस्सा है। रेगिस्तान जैसे संवेदनशील क्षेत्र में हर एक पेड़ जीवनरेखा का काम करता है—इसलिए इसकी रक्षा अब जन-आंदोलन बन चुकी है।
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