निसंतान कहलाने पर पहली बार छलका किरोड़ी मीणा की पत्नी गोलमा देवी का दर्द, जानिए क्या कहा?

निसंतान कहलाने पर पहली बार छलका किरोड़ी मीणा की पत्नी गोलमा देवी का दर्द, जानिए क्या कहा?
राजस्थान
18 Feb 2026, 06:06 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

राजस्थान की सियासत और समाज दोनों में आज एक बेहद संवेदनशील, मार्मिक चर्चा छिड़ी हुई है। कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की पत्नी, पूर्व मंत्री और मीणा समाज की सम्मानित नेता गोलमा देवी को निसंतान होने पर एक लोक गायक के किए गए अपमानजनक कटाक्ष ने पूरे प्रदेश में तूफान खड़ा कर दिया। अब गोलमा देवी ने जिस शालीनता, धैर्य और ममता से जवाब दिया है, वह न सिर्फ मीणा समाज बल्कि पूरे राजस्थान की महिलाओं के लिए एक मिसाल बन गया है।

लोकगायक ने गोलमा देवी की निःसंतानता पर गाया था गीत

ये मामला शुरू हुआ बस्सी के नैनाथ मेले में। हाल ही में आयोजित इस पावन मेले के मंच पर लोक गायक ताराचंद मीणा चैनपुरा ने गोलमा देवी जी के निसंतान होने पर उलाहना भरा गीत गाया।

इस टिप्पणी ने मीणा समाज में भारी आक्रोश पैदा कर दिया। कोटखावदा तहसील के आदिवासी मीणा सेवा संघ समेत कई सामाजिक संगठनों ने तुरंत बैठक बुलाई और गायक ताराचंद को सामाजिक बहिष्कार का फैसला लिया। उन्हें 10 दिन का समय दिया गया कि वे गोलमा देवी जी से माफी मांगें, वरना पूरे समाज से रीति-रिवाजों से अलग कर दिया जाएगा। लेकिन 17 फरवरी को गोलमा देवी जी ने खुद फेसबुक पर एक लंबा और दिल छू लेने वाला बयान जारी किया, जो अब पूरे राजस्थान में वायरल हो रहा है।

गोलमा देवी ने लिखा ये पोस्ट

गोलमा देवी ने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा कि “ये उनके जीवन का परम सत्य है कि ईश्वर ने हमें संतान का सौभाग्य नहीं दिया। हमने राजस्थान की समस्त संतानों को अपना ही माना है। मुझे कभी यह एहसास नहीं होने दिया कि मैं निस्संतान हूं। ”उन्होंने आगे कहा, “निस्संतान महिला को हेय दृष्टि से देखा जाता है, व्यंग्य किए जाते हैं। नैनाथ मेले में गायक द्वारा कटाक्ष किया गया। पूर्व में नरेश मीणा द्वारा भी व्यंग्य किया गया। मेने जन-जन को अपना परिवार मान लिया है।”सबसे बड़ी बात – गोलमा देवी ने गायक को हृदय से क्षमा कर दी और समाज से अपील की कि अब इस मामले को आगे न बढ़ाया जाए।“

गोलमा देवी के इस मामले को मनोज मीणा ने भी खुलकर उनका समर्थन किया है। मनोज मीणा ने इस अपमान को निंदनीय बताते हुए गोलमा को मातृ सम्मान दिया। ये पल राजस्थान की राजनीति में दुर्लभ हैं। जहां कभी विरोध था, वहां आज सम्मान और ममता दिख रही है। यह घटना हमें सिखाती है कि व्यक्तिगत जीवन पर टिप्पणी करना कितना गलत है, खासकर महिलाओं के साथ। गोलमा देवी ने साबित कर दिया कि सच्ची ममता संतान से नहीं, हृदय से होती है। 


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