फेम के लिए मगरमच्छों पर बम फेंकना पड़ेगा भारी, मिलेगी कड़ी सज़ा

फेम के लिए मगरमच्छों पर बम फेंकना पड़ेगा भारी, मिलेगी कड़ी सज़ा
राजस्थान
13 Apr 2026, 03:38 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए कोटा में एक शख्स ने मगरमच्छों सुतली बम फेंक दिया। जिस पर अब वन विभाग ने FIR दर्ज करवाई है। कोटा के चंद्रलोही नदी से युवक ने सोशल मीडिया पर रील बनाने और फेमस होने के लिए वन्यजीवों के साथ क्रूरता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। युवक ने मगरमच्छों के झुंड के बीच सुतली बम फेंककर रील बनाई उसके बाद रील अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर डाली उसके बाद वीडियो तेजी से वायरल हुआ।

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि युवक जलता हुआ बम मगरमच्छों पर फेंक रहा है। बम फूटते ही मगरमच्छ घबराकर तेजी से पानी में इधर उधर कूदने लगते हैं। इस हरकत से आस-पास मौजूद अन्य जीव-जंतुओं पर भी खतरा पैदा हो गया। वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारी ए. के. श्रीवास्तव ने बताया कि युवक की पहचान कर ली गई है। और कोटा सिटी SP को मामला भेजकर FIR दर्ज कराई गई है। वहीं शिकायत दर्ज होने के बाद ये विडियो युवक ने डिलीट कर दिया।

कोटा में मगरमच्छों के ऊपर फेका बम!#Kota #RajasthanNews #Crocodile @RajsthanPolice5 pic.twitter.com/VzrBj3coob
— Bharat Raftar TV (@BharatRaftarTV) April 13, 2026

आरोपी के खिलाफ ये हो सकती है कानूनी कार्यवाही

1.वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अपराध- मगरमच्छ भारत में संरक्षित प्रजातियों में (Schedule-1) में आता है

मगरमच्छ को मारना, घायल करना या पकड़ना गंभीर अपराध है। इस अपराध को करने पर 3 से 7 साल तक की जेल और ₹10,000 से ₹25,000 या उससे ज्यादा जुर्माना और व्यक्ति के (दोहराने पर और ज्यादा) सजा का कानून में प्रावधान है। यह अपराध गैर-जमानती अपराध है। इस अपराध में आसानी से जमानत नहीं मिलती।

2.आईटी एक्ट, 2000 (Information Technology Act, 2000) के तहत सोशल मीडिया पर हिंसा को बढ़ावा देने या क्रूरता दिखाने के कारण IT एक्ट, 2000 (संशोधित 2008) के तहत सोशल मीडिया पर हिंसा, नफरत या क्रूरता फैलाने के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। मुख्य रूप से धारा 66F (साइबर आतंकवाद), धारा 67 (अश्लील सामग्री), और धारा 69A (कंटेंट ब्लॉक करना) के तहत 3 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और भारी जुर्माने के प्रावधान हैं।

3.पशु क्रूरता से संबंधित कानून (Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960) के तहत भी मामला बन सकता है।

(धारा 1): जानवरों के प्रति क्रूरता को रोकना और उन्हें अनावश्यक दर्द या यातना से बचाना।

पशु कल्याण बोर्ड (धारा 4): अधिनियम के तहत भारत में पशुओं की देखभाल के लिए एक 'भारतीय पशु कल्याण बोर्ड' (AWBI) की स्थापना की गई है।

क्रूरता के कृत्य (धारा 11): इस धारा के तहत इन्हें अपराध माना गया है जैसे- किसी जानवर को पीटना, लात मारना, या उस पर अधिक भार लादना। बीमार या घायल जानवर से काम लेना। जानवर को अनावश्यक रूप से भोजन, पानी या आश्रय से वंचित रखना। जानवर को ऐसे स्थान में रखना जहां वह स्वतंत्र रूप से घूम न सके।

दंड: अगर कोई व्यक्ति धारा 11 के तहत अपराध करता है। तो उसे जुर्माना (जो ₹200 तक हो सकता है, गंभीर मामलों में ज्यादा) या कारावास (3 महीने तक) या दोनों हो सकते हैं।

प्रायोगिक पशु (धारा 14-17): शिक्षा या अनुसंधान के लिए पशुओं पर प्रयोगों को विनियमित करने के लिए नियम।

कंटेंट एंड रिसर्च- एडवोकेट प्रत्युष तिवाड़ी, कानूनी विशेषज्ञ


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