Rajput Vs Meena Politics: राजपूतों पर ये क्या कह गए मनोज मीणा? जानें पूरा मामला

Rajasthan Politics: राजस्थान की राजनीति हो और उसमें जातिवाद की चिंगारी ना हो ऐसा तो हो नहीं सकता। अब राजस्थान युवाशक्ति एकीकृत महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मनोज मीणा ने राजपूतों पर ऐसी बात बोल दी कि सियासी हंगामा मच गया है। मनोज मीणा ने बूंदी जिला बसाने वाले बूंदा मीणा को लेकर जनसभा को संबोधित करते हुए मनोज मीणा ने सीधे तौर पर राजपूत समाज पर ही प्रहार कर दिया।
राजपूतों का अपना बाप नहीं- मनोज मीणा
जहां एक तरफ नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल लगातार राजपूत समाज को साधने की कोशिश करते हैं, उन्हें अपना भाई बताते हैं और '36 कौम' के साथ चलने की बात करते हैं। वहीं उनके करीबी माने जाने वाले मनोज मीणा ने सीधे तौर पर बूंदा मीणा और राजपूत समाज के संबंधों को लेकर एक विवादित प्रश्न खड़ा कर दिया है। मनोज मीणा ने कहा कि "राजपूत समाज बूंदा मीणा को अपना ‘बाप’ कहते हैं क्या उनका अपना बाप नहीं है?" साथ ही उन्होंने महाराणा प्रताप को भी आदिवासी बताया। ये बयान ना केवल ऐतिहासिक संदर्भों को चुनौती देता है, बल्कि एक पूरे समाज की अस्मिता पर सवाल उठाता है।
ये बयान अब राजस्थान की फिजाओं में जहर घोलने का काम कर रहा है। मनोज मीणा, जिन्हें अक्सर हनुमान बेनीवाल के नक्शेकदम पर चलते देखा गया है। लेकिन इस बयान से अब वो राजपूतों के निशाने पर आ सकते हैं। सवाल अब ये है कि इस बयान के पीछे की मंशा क्या है? क्या यह केवल सुर्खियां बटोरने का जरिया है या फिर राजस्थान की राजनीति में किसी नए ध्रुवीकरण की कोशिश?
राजपूतों में बेहद सम्माननीय हैं बूंदा मीणा
इतिहास गवाह है कि बूंदा मीणा और राजस्थान के राजघरानों के बीच के संबंध बेहद गहरे और सम्मानजनक रहे हैं। लेकिन मनोज मीणा के इस 'कठोर' शब्दों वाले प्रहार ने अब राजपूत करणी सेना और अन्य राजपूत संगठनों को मैदान में उतरने पर मजबूर कर दिया है। अब देखना ये होगा की करणी सेना के अध्यक्ष की इसपर क्या प्रतिक्रिया आती है, राजपूत समाज के युवा सोशल मीडिया पर कमैंट्स में कह रहे हैं की आजकल राजपूतों का नाम लिये बिना किसी का घर नहीं चलता।
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