Manvendra Singh Jasol: दूसरी पत्नी के चक्कर में पार्टी गंवाएंगे मानवेंद्र सिंह जसोल?

Jasol Marriage Controversy: राजस्थान की सियासत में राजनीति से ज्यादा शादी-ब्याह के मामले गूंज रहे है। चाहे वो कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर (Mukesh Bhakar) की हो, छात्र नेता सुनील चौधरी की हो या फिर मानवेंद्र सिंह जसोल की। लेकिन मुद्दा मानवेंद्र सिंह जसोल का गर्माया हुआ है। इसकी गूँज जयपुर से लेकर दिल्ली तक सुनाई दे रही है। बीजेपी पूर्व सांसद मानवेंद्र सिंह जसोल (Manvendra Singh Jasol) के सामने अब पार्टी और जाति से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में उनके सामने एक तरफ सदियों पुरानी सामाजिक मर्यादा है और दूसरी तरफ उनका अपना व्यक्तिगत फैसला। क्योंकि जोधपुर के चारण छात्रावास में बीते दिन इस पर बड़ी बैठक हुई और पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi), मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लेटर लिखा।
बीजेपी से बाहर निकालने की उठाई मांग
चारण समाज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajan Lal Sharma) के साथ ही बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को भी लेटर लिखा है। उन्होंने जसोल की शादी के रिश्ते को निंदनीय बता दिया और मानवेंद्र सिंह को बीजेपी से बाहर निकालने की मांग की।
पत्नी को छोड़ेंगे या जाति-पार्टी से बाहर होंगे जसोल?
सवाल केवल एक शादी का नहीं है, सवाल उस 'भाई-बहन' के पवित्र रिश्ते का है जो जसोल (राजपूत) और चारण समाज के बीच पीढ़ियों से चला आ रहा है। मानवेंद्र सिंह जसोल की मां और उनका अपना परिवार भी इस विवाह के खिलाफ है। अब चर्चा इस बात की है कि क्या मानविंदर सिंह इस चौतरफा दबाव के आगे झुक जाएंगे? क्या वो अपनी नई पत्नी नीजा सिंह चारण से दूरी बना लेंगे या फिर समाज और परिवार की नाराजगी मोल लेकर इस रिश्ते को निभाएंगे? अगर वो ऐसा करते हैं तो शायद उन्हें अपनी पार्टी से भी हाथ धोना पड़ सकता है।
ये पारिवारिक-सामाजिक मामला या सियासी?
दूसरी तरफ सियासी गलियारों में चर्चा तेज़ है कि क्या ये मानवेंद्र सिंह के बढ़ते कद को 'साइडलाइन' करने की कोई गहरी साजिश है? क्या उनके विरोधियों ने इस सामाजिक मुद्दे को ढाल बनाकर उनके राजनीतिक करियर पर 'ब्रेक' लगाने की तैयारी कर ली है? मानवेंद्र सिंह के इस मुद्दे पर राजेंद्र गुढ़ा जैसे नेताओं ने तो बयान दिए हैं, लेकिन बीजेपी की तरफ इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। ऐसे में अब ये देखना दिलचस्प रहेगा कि चारण समाज के पत्र पर बीजेपी आलाकमान क्या फैसला लेता है।
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