नरेश मीणा के सामने झुकी सरकार! रात भर हाईवे पर चले हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद मांगों पर बनी सहमति

Naresh Meena: किसान नेता नरेश मीणा अपने हजारों समर्थकों के साथ उनियारा की जिन मांगों को लेकर जयपुर कूच करने निकले थे, उन मांगों पर अब सरकार ने अपनी सहमति जता दी है। बीते शुक्रवार को पुलिस ने टोंक के आमली मोड़ पर नेशनल हाईवे-116 पर नरेश मीणा और उनके कूच को रोक दिया था। जिसके बाद पुलिस-प्रशासन ने नरेश मीणा से बातचीत की और फिर ये सहमति बनी।
इन मांगों पर सरकार ने जताई सहमति
नरेश मीणा से बात करने के लिए ADM टोंक, ASP और संभागीय आयुक्त थे। अजमेर के संभागीय आयुक्त ने खुद फोन पर नरेश मीणा से सीधी बात की। सरकार ने जिन बातों पर लिखित सहमति दी है, उसमें पहले नंबर पर समरावता हिंसा है। इनके पीड़ितों को जल्द मुआवजा मिलेगा। वहां स्कूल के नए भवन का प्रस्ताव तुरंत भेजने का वादा भी सरकार ने किया है। इसके अलावा आंदोलन में फंसे 60 युवाओं के मुकदमे हटाने के मुद्दे पर समीक्षा का आश्वासन भी दिया गया है। सोप और नगरफोर्ट थानों में पुलिस पर लगे बर्बरता के आरोप की उच्च स्तरीय जांच की मांग भी मानी गई हैं।
नरेश मीणा की थी ये मांगें
बता दें कि नरेश मीणा देवली-उनियारा की 11 सूत्रीय मांगों के साथ निकले थे। इनमें 14 गांवों को उनियारा तहसील में जोड़ना, किसानों को MSP और फसल बीमा का समय पर भुगतान, ईसरदा और गलवा बांध प्रभावितों का पुनर्वास। हाईवे पर टोल वसूली की अनियमितताएं, गांवों की सड़क और पानी की समस्याएं शामिल हैं।
वहीं सियासी जानकारों का कहना है कि हनुमान बेनीवाल के नक्शेकदम पर चल रहे नरेश मीणा को इसका फायदा मिलता दिखाई दे रहा है। जिस तरह सरकार ने हनुमान बेनीवाल की मांगें आधी रात मानी थी जिसके लिए वो प्रदर्शन कर रहे थे। उसी तरह अब नरेश मीणा की भी मांगें सरकार ने मानी हैं। आधी रात वाली ये डील बताती है कि सरकार भी जानती है कि भीड़ और संघर्ष के सामने बातचीत ही एकमात्र रास्ता बचती है। फिलहाल नरेश मीणा का कूच रुका है पर मांगें पूरी हुईं या नहीं। ये आने वाले दिनों में साफ होगा।
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