राजस्थान विधानसभा: स्कूटी योजना पर बीजेपी के मंत्रियों और टीकाराम जूली के बीच तीखी नोंकझोंक

राजस्थान विधानसभा: स्कूटी योजना पर बीजेपी के मंत्रियों और टीकाराम जूली के बीच तीखी नोंकझोंक
राजस्थान
23 Feb 2026, 03:34 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Jaipur: राजस्थान विधानसभा में सोमवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। बहस इतनी तीखी हो गई कि सदन के सदस्य अपनी मर्यादा तक भूलते नजर आए। मुद्दा था दिव्यांगों के लिए स्कूटी वितरण योजना पर पूछे गए सवाल का। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग के बीच बहस हो रही थी। तभी मंत्री अविनाश गहलोत बोले कि आज सदन में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आए हुए हैं इसलिए इनके नेताओं के बीच होड है बस इसी बात पर जूली भड़क गए और सदन में हंगामा मच गया।


कैलाश वर्मा ने पूछा था सवाल


दरअसल बीजेपी विधायक कैलाश वर्मा ने अपने इलाके में दिव्यांगों को स्कूटी नहीं मिलने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने करीब 20 लाभार्थियों के आवेदन भेजे थे, लेकिन देरी की वजह से स्कूटी की लागत बढ़ गई। तो क्या सरकार इस देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी?

इस मामले पर जब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अतिरिक्त सवाल पूछा तो मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने इस पर एतराज जताया और क्या कि “ये सवाल बगरू इलाके से जुड़ा है, इनका इससे क्या लेना-देना?”

इसी टिप्पणी पर जूली भड़क गए और उन्होंने चिल्लाकर कहा कि “क्या लेना-देना है? पूरे प्रदेश की स्कूटी योजना का मामला है। समय पर नहीं बांटेंगे तो लागत बढ़ेगी। अधिकारी जिम्मेदार हैं तो कार्रवाई कौन करेगा?”

इस सवाल पर मंत्री अविनाश गहलोत ने अपना जवाब शुरू करते ही कहा कि उन्हें लगता है कि आज “सवाल पूछने की होड़ चल रही है क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज सदन में मौजूद हैं।"

इस पर जूली ने कहा कि “ये राजनीतिक टिप्पणी क्यों की जा रही है? जो पूछा है उसका जवाब दीजिए। विधानसभा को मजाक बना रखा है क्या!” इस पर मंत्री अविनाश गहलोत भी खड़े हो गए और बोले कि “ज्यादा तेज आवाज में बोलने से झूठ सच नहीं हो जाता।” इस पर दोनों के बीच जोरदार बहस हुई होती देख सदन का माहौल गरमा गया।

मंत्री अविनाश गहलोत ने दिया ये जवाब

इस हंगामे पर स्पीकर वासुदेव देवनानी ने दोनों पक्षों को शांत कराया। इसके बाद अविनाश गहलोत ने इस योजना के सवाल पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि-


-स्कूटी योजना के टेंडर ऑनलाइन होते हैं


-इसमें अधिकारी की कोई भूमिका नहीं होती


-लाभार्थियों के दस्तावेज सत्यापित करने में समय लगता है


-पिछली सरकार में भी प्रक्रिया इसी तरह चलती थी


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