बेड़िया प्रथा: जहां घर के पुरुष ही अपनी बहन-बेटियों से कराते देह व्यापार, 300 साल पुरानी परंपरा आखिर क्यों निभा रहा ये समुदाय

Bediya Tradition: सोचिए, एक ऐसा देश, जो चांद पर कदम रखने की तैयारी कर रहा है। लेकिन उसी देश के दिल में एक ऐसी सच्चाई दबी है, जो सुनकर भी आप यकीन नहीं कर पाएंगे। 300 साल पुरानी परंपरा और उसका पूरा भार ढोती महिलाएं और हैरत की बात? उनके ही घर के पुरुष उनकी ही बहन-बेटियों के लिए ग्राहक तलाशते हैं। ये कहानी सिर्फ दर्द की नहीं ये समाज के उस काले सच की है, जिसे हम देखने से बचते हैं।
300 साल पुरानी प्रथा चला रहा ये समुदाय
भारत की तरक्की की कहानियां हर दिन सुर्खियाँ बनती हैं। टेक्नोलॉजी, साइंस, स्टार्टअप, सबकुछ तेज रफ़्तार पर। लेकिन इसी देश में एक समुदाय है, जिसकी औरतें 300 साल पुरानी परंपरा का बोझ ढो रही हैं। वो परंपरा जो उनके शरीर पर, उनकी ज़िंदगी पर, उनके भविष्य पर जबरन लादी गई है। इसका नाम है बेड़िया प्रथा। जहां औरतें मेहनत करती हैं और पुरुष उनकी कमाई पर जीते हैं।
कैसे शुरू हुई ये प्रथा?
ये प्रथा घूमंतू और अर्ध घुमंतू समुदाय के लोगों में प्रचलित है। इनकी मौजूदगी राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड में है। ये बेड़िया समुदाय से होते हैं। ये कहानी शुरू होती है सदियों पहले से- कहा जाता है कि ये समुदाय कभी दरबारों और रईसों के घरों में कला का प्रदर्शन करता था। नृत्य, मनोरंजन, रंग-रूप… यही पहचान थी। लेकिन जब ये काम बंद हो गया— तो उनकी दुनिया पलट गई।
गरीबी, बेरोजगारी और समाज की बेरुखी ने उन्हें ऐसी जगह धकेल दिया…जहां से अब तक कोई निकल नहीं पाया। बेड़िया समुदाय में एक और चौंकाने वाली बात ये है कि अगर लड़की समुदाय से बाहर शादी कर ले, तो वह इस दलदल से बच जाती है। लेकिन घर में कोई अविवाहित लड़की है? तो पूरा परिवार उसी पर टिक जाता है। उसे पढ़ने नहीं दिया जाता…उसे मौके नहीं दिए जाते…उसे सीधा उस धंधे में धकेल दिया जाता है, जिसे वो खुद कभी चुनती ही नहीं।
बेटी के जन्म पर खुशी और बेटे पर शोक
इस समुदाय में लडकियां जब जन्म लेती हैं तब उनके माता-पिता बड़ी खुशियां मनाते हैं। वहीं बेटे के जन्म पर शोक। क्योंकि उन्हें कमाई का जरिया माना जाता है। यहां पुत्रवधु से कमाई नहीं कराते…लेकिन बेटियों को खाड़ी देशों तक भेज दिया जाता है। कहीं डांस बार तो कहीं दलालों का नेटवर्क…और वापस सिर्फ टूटी हुई जिंदगियां। हम आज उस दौर में हैं, जहां महिलाएं अंतरिक्ष में जा रही हैं, फाइटर जेट उड़ा रही हैं, कंपनियां चला रही हैं। लेकिन बेड़िया महिलाओं के लिए? दो वक्त की इज्जत की रोटी भी चुनौती है। समाज में इस समुदाय के बेटियों को इज्जत भी नसीब नहीं होती। हालांकि प्रशासन कोशिश करता है कि शिक्षा, पुनर्वास, कानून…लेकिन जमीन पर तस्वीर अब भी वैसी ही है।
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