राजस्थान दिवस: राजघरानों से लेकर वर्तमान सियासत तक...आखिर कैसे बना राजस्थान?

राजस्थान दिवस: राजघरानों से लेकर वर्तमान सियासत तक...आखिर कैसे बना राजस्थान?
राजस्थान
19 Mar 2026, 11:03 am
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Rajasthan Diwas: पधारो म्हारे देश की धुन लिए राजस्थान आज भारत का ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध एक ऐसा राज्य है, जिसकी खूबसूरती, रजवाड़ी मिजाज, रंग-रंगीली छटा को देखने के लिए लोग खुद-ब-खुद खींचे चले आते हैं। ‘राजपूताना’ को ‘राजस्थान’ बनाने के लिए जिन शूरवीर राजा-महाराजाओं ने अपने शौर्य और पराक्रम के दम पर राजस्थान (Rajasthan Diwas History) को किसी के आगे झुकने ना दिया, उन्हें पूरा देश नतमस्तक होकर प्रणाम करता है। आज जो राजस्थान आप देखते हैं, वो पहले से काफी अलग है। यहां हम आपको राजस्थान के बनने की कहानी बता रहे हैं।

राजस्थान की स्थापना एक लंबी, राजनीतिक रूप से जटिल प्रक्रिया का नतीजा है। जिसे पूरा करने में लगभग 7 साल लगे। इसमें राजघरानों की सहमति, केंद्र की कूटनीति और स्थानीय जनता के संघर्ष की भी बड़ी भूमिका रही है।

रियासतों का बिखरा हुआ इलाका

अंग्रेजों के साम्राज्य में 1947 से पहले ये पूरा क्षेत्र ‘राजपूताना’ कहलाता था। जो 22 रियासतों और 1 मुख्य प्रांत- अजमेर-मेरवाड़ा में बंटा हुआ था। हर रियासत का अपना राजा, अपना कानून और अपनी प्रशासनिक व्यवस्था थी। आजादी के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी कि इतने टुकड़ों को जोड़कर एक राज्य कैसे बनाया जाए?

राजस्थान बनने की पूरी कहानी

1948 में मातस्य संघ का गठन: सबसे पहले अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली को मिलाकर मातस्य संघ बनाया गया था। ये पहला चरण था जिसमें राजस्थान को एक करने की शुरुआत की गई थी।

25 मार्च 1948: राजस्थान संघ के लिए कई पूर्वी और दक्षिणी रियासतें एक साथ आईं। इनमें कोटा, बूंदी, झालावाड़, प्रतापगढ़, किशनगढ़, टोंक जैसी रियासतें शामिल थीं। इस संघ के प्रमुख कोटा के महाराव भीम सिंह द्वितीय बने।

18 अप्रैल 1948: इस दिन राजस्थान संघ में उदयपुर का विलय हुआ। बता दें कि मेवाड़ (उदयपुर) को लंबे समय संघ में शामिल करने की जद्दोजहद की जा रही थी। जब उदयपुर संघ में शामिल हुआ तो राजस्थान संघ की संरचना और मज़बूत हुई।

30 मार्च 1949: ग्रेटर राजस्थान का गठन हुआ। इसे ही राजस्थान दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन जयपुर सहित प्रमुख राजपूत रियासतें बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर ‘राजस्थान संघ’ में शामिल हुईं थीं। यही वजह है कि 30 मार्च को राजस्थान दिवस मनाया जाता है।

15 मई 1949: संयुक्त राजस्थान में फिर अलवर-भरतपुर (मातस्य संघ) भी शामिल हो गए।

26 जनवरी 1950: “संयुक्त राजस्थान” को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। इसे राजस्थान राज्य के तौर पर जाना गया।

1 नवंबर 1956: वर्तमान राजस्थान का निर्माण हुआ। इसमें अजमेर-मेरवाड़ा प्रांत का विलय, आबू रोड का गुजरात को सौंपा जाना और सरहदी जिलों का विलय, इसी के बाद राजस्थान आज की सीमाओं में आया।

30 मार्च को स्थापना तो 19 मार्च को क्यों मनाया जा रहा राजस्थान दिवस?

कई लोगों में सवाल है कि अगर 30 मार्च को राजस्थान की स्थापना हुई थी तो फिर 19 मार्च को क्यों राजस्थान दिवस मनाया जा रहा है? दरअसल दो साल पहले राजस्थान सरकार ने ये फैसला लिया था कि ग्रैगोरियन कैलेंडर (अभी जो हम इस्तेमाल करते हैं) के बजाय हिंदी पंचांग की तिथि के मुताबिक ही राजस्थान दिवस मनाया जाएगा। क्योंकि 19 मार्च को चैत्र प्रतिपदा (नया साल) की शुरूआत हुई है। इस दिन मनाने से राजस्थान की संस्कृति और पंचांग परंपरा को मजबूत होगी। बता दें कि इसी वजह से पिछले साल राजस्थान दिवस 25 मार्च को मनाया गया था।

स्थापना में किसने-किसने निभाई भूमिका?

राजस्थान की स्थापना में राजपूत रियासतों के महाराजा जैसे जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय, मेवाड़ के महाराणा भूपालसिंह, कोटा के महाराव भीमसिंह और बीकानेर के महाराजा सार्दुल सिंह ने बड़ी भूमिका निभाई। वहीं तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल, भारत के एकीकरण में प्रमुख भूमिका निभाने वाले वी.पी. मेनन को राजस्थान के एकीकरण का श्रेय जाता है। इनके अलावा स्थानीय नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों का दबाव और सामूहिक प्रयास भी बड़ी भूमिकाओं में थे और आज राजस्थान का देश के सबसे बड़े राज्य (क्षेत्रफल की दृष्टि) के तौर पर जाना जाता है।


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